स्कूल की साफ-सफाई से लेकर घंटी तक बजा रहे प्रिंसिपल! परेशान होकर शिक्षा अधिकारी को लिखा पत्र, की यह मांग

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स्कूल में स्टाफ की कमी के चलते अल्मोड़ा के जीआईसी नैनी चौगर्खा के प्रभारी प्रधानाचार्य को स्कूल में घंटी बजाने से लेकर सफाई के काम में भी खुद लगना पड़ रहा है। प्रभारी प्रधानाचार्य ने इससे आजिज आकर मुख्य शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर स्वयं को प्रधानाचार्य के प्रभार से मुक्त करने का अनुरोध किया है। अगले साल सेवानिवृत्त होने वाले 59 वर्षीय प्रभारी प्रधानाचार्य का यह पत्र शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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मूल रूप से दरभंगा (बिहार) निवासी इंद्र कुमार झा ने अल्मोड़ा जिले के धौलादेवी ब्लॉक स्थित राजकीय इंटर कॉलेज, नैनी चौगर्खा में 2002 में रसायन विज्ञान के रूप में तैनाती ली थी। साल 2013 में झा को स्कूल के प्रभारी प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी मिली। प्रभारी प्रधानाचार्य झा का कहना है कि इस स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के चार पद सृजित हैं, जिनमें से केवल एक कर्मचारी यहां कार्यरत है। करीब 59 वर्षीय यह चतुर्थ कर्मचारी अक्सर बीमार रहते हैं।

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स्कूल के कार्यालय में दो लिपिक हैं, एक लिपिक दो-ढाई साल से नैनीताल जिले के भूमियाधार जबकि दूसरे लिपिक को सल्ट (अल्मोड़ा) में संबद्ध कर रखा था। इनमें से एक लिपिक नैनी चौगर्खा जीआईसी में 15 दिन तो दूसरे लिपिक सिर्फ 10 दिन सेवाएं देने आते हैं। झा का कहना है कि उनके लिखित आदेश को स्कूल का स्टाफ और शिक्षक नहीं मान रहे हैं और उनका विरोध करते हैं। इस कारण वे अवसाद ग्रसित हो रहे हैं और उन्हें कई अन्य बीमारियां भी जकड़ रही हैं।

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उन्होंने बताया कि उन पर कई बार उनके आवास पर हमले हो चुके हैं। उन्होंने भविष्य में भी खुद पर हमले की आशंका जतायी है। झा का कहना है कि लिपिकों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी के कारण विद्यालय की सफाई से लेकर घंटी बजाने तक का काम करते-करते वह परेशान हो चुके हैं।

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इसलिए उन्हें प्रभारी प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाए। दूसरी ओर दोनों लिपिकों का कहना है कि वह दूसरे कार्य स्थल पर रहकर भी नैनी चौगर्खा जीआईसी के ऑफिस कार्य ऑनलाइन करते रहे हैं। उनके अन्य स्कूलों में संबद्ध होने से इस स्कूल का कोई कार्य नहीं अटकता है।

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जीआईसी नैनी चौगर्खा में 237 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। यहां मिन्ट्रिरीयल स्टाफ नहीं है। प्रभारी प्रधानाचार्य इंद्र कुमार झा ने कहा कि कई बार चतुर्थ श्रेणी नहीं होने के कारण उन्हें शिक्षकों के साथ स्कूल की सफाई, घंटी बजाने और कक्षाओं और कार्यालयों के ताले खोलने तक का काम भी करना पड़ रहा है। हालांकि उन्हें पद से हटाने को लेकर साल 2020 में क्षेत्र में आंदोलन भी हो चुका है।

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नैनी चौगर्खा (अल्मोड़ा) के जीआईसी पीटीए अध्यक्ष रमेश भट्ट ने कहा, ‘नैनी चौगर्खा जीआईसी की व्यवस्थाएं बेपटरी हो चुकी हैं। दो-ढाई साल से दोनों लिपिक संबद्ध चल रहे हैं। एकमात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मी बुजुर्ग और बीमार हैं। कई बार प्रधानाचार्य और शक्षिकों को सफाई, घंटी बजाने और ताला खोलने का काम खुद करना पड़ता है। स्कूल की व्यवस्थाओं के लिए जल्द बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।

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अल्मोड़ा के शिक्षा अधिकारी सुभाष चंद्र भट्ट ने कहा, ‘नैनी चौगर्खा जीआईसी के प्रभारी प्रधानाचार्य की ओर से भेजा गया पत्र अभी नहीं मिला है। इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी धौलादेवी से वार्ता कर जानकारी जुटाई जाएगी। संबद्ध हुए स्टाफ के बारे में भी जानकारी ली जा रही है।’

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Author: samachardoot

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