असम में बाढ़ से तबाही मची हुई है। जमुनामुख जिले के दो गांवों के 500 से अधिक परिवारों को रेलवे पटरियों पर रहना पड़ा है। इन लोगों को रेलवे ट्रैक का सहारा इसलिए लेना पड़ा है क्योंकि पूरे इलाके में रेल की पटरियां ही एकमात्र ऐसी जगह थी जो बाढ़ के पानी में नहीं डूबी थी।
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रिपोर्ट्स बताती हैं कि पटिया पत्थर गांव के निवासियों ने बाढ़ में अपना करीब-करीब सबकुछ खो दिया है और ये लोग नजदीक में अस्थायी शेड के नीचे रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें जिला प्रशासन, राज्य सरकार या फिर केंद्र सरकार से कुछ खास मदद नहीं मिली है।
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असम में बारिश और बाढ़ से हालात चिंताजनक बनी हुई है। लगातार हो रही बारिश के कारण 29 जिलों के 2585 गांवों में 8 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बारिश के कारण हुए भूस्खलन से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। अस्थायी शेड में रह रहे लोग अमानवीय परिस्थिति में रह रहे हैं। कई लोग कई दिनों से भूखे हैं और खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
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लोगों ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि बाढ़ के कारण हमारा घर बह गया है। कटने के लिए तैयार हमारी फसल बर्बाद हो गई है। हमें साफ पानी तक नहीं मिल रहा है। हमें पिछले चार दिनों से सिर्फ एक वक्त का खाना मिल रहा है, वह भी कुछ अधपके चावल।
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सेना, अर्धसैनिक बलों और राष्ट्रीय और राज्य आपदा राहत बलों ने कथित तौर पर नावों और हेलीकॉप्टरों के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 21,884 लोगों को निकाला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 86,772 लोगों ने 343 राहत शिविरों में शरण ली है जबकि अन्य 411 राहत वितरण केंद्र भी चालू हैं।









