बच्चों को माता-पिता दोनों से मिलने का अधिकार

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रायपुर/16 सितंबर 2025/ छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, सदस्यगण श्रीमती सरला कोसरिया, श्रीमती ओजस्वी मंडावी ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 345 वी. एवं रायपुर जिले में 164 वी. जनसुनवाई की गई।

 

आज की सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में दोनो पक्ष शासकीय विभाग में विशेष रोजगार कार्यालय में कार्यरत् है और सरकारी नौकरी में होने वाली आपसी शिकयत व शोकाॅज नोटिस को लेकर आयोग के समक्ष उपस्थित हुए है। आयोग द्वारा समझाईश दिया गया कि विभागीय कार्य की शिकायत अपने उच्चाधिकारियों को किया जा सकता है। इस प्रकरण में आयोग की ओर से विभागिय सचिव को पत्र भेजा जायेगा, ताकि दोनो पक्षों के मध्य विवाद का निराकरण किया जा सके।

एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदिका अपनी उधार रकम वापस लेने के लिए घर में घुसकर मारपीट करती है। अनावेदिका का कथन है कि उसने कभी भी घर में जाकर पैसा वसूली की कोई धमकी या मारपीट नहीं किया है। आयोग द्वारा दोनो पक्षों को सुने जाने के बाद अनावेदक को समझाईश दिया गया कि वह आवेदिका के घर में घुसकर मारपीट व गाली-गलौच ना करें ऐसा करने पर आवेदिका द्वारा अनावेदिका पर एफ.आर.आर. दर्ज किया जा सकेगा।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिकागणों ने अनावेदक के खिलाफ शिकायत प्रस्तुत किया कि वह अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते है और धमकाते रहते है। सभी आवेदिका मध्यान भोजन बनाने वाले समूह से है। आयोग द्वारा अनावेदक को समझाईश दिया गया कि वह आवेदिकागणों के कामों में रोक-टोक ना करें और ना ही कार्य से निकालने की धमकी दे सभी आवेदिकागणों से सम्मानजनक व्यवहार करें। इस स्तर पर प्रकरण को 1 वर्ष निगरानी में रखा गया।

 

एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि दोनो पक्ष आपस में पति-पत्नि है और शासकीय स्कूल में शिक्षक है। दोनो के 14 वर्ष व 07 वर्ष के दो पुत्र है। 05 माह से दोनो पति-पत्नि अलग रह रहे है। आवेदिका बच्चों को अनावेदक से मिलने नहीं देती है। आवेदिका ने कुटुम्ब न्यायालय में प्रकरण दायर कर रखा है। अतः प्रकरण नहीं चलाना चाहती है। आयोग ने आदेशित किया कि अनावेदक अपने दोनो बच्चों से मिलने प्रति सप्ताह आवेदिका के निवास पर जाकर बच्चों से मिल सकेगा और आवेदिका उस पर कोई रोक नहीं लगायेगी इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका व अनावेदक के माता-पिता उप. हुए उन्होने बताया कि अनावेदक वर्तमान में 17 वर्षीय नाबालिक है उसके स्कूल के दसतावेज व जन्म प्रमाण पत्र व आधार कार्ड की काॅपी आयोग में प्रस्तुत किया गया। अनावेदक के पिता ने बताया कि उनके द्वारा बाल संरक्षण आयोग में आवेदिका के खिलाफ लिखित शिकायत दो माह पूर्व किया गया है। आवेदिका 28 वर्ष की है आवेदिका से पूछने पर उसने बताया कि वह 28 वर्ष की है और उसे नहीं मालूम था कि अनावेदक 17 वर्ष का नाबालिक है। फरवरी माह में आवेदिका थाना पुरानी बस्ती में गई तब उसे पता चला कि अनावेदक नाबालिक है। आवेदिका अपने साथ हुए दैहिक शोषण के लिए अनावेदक से 50 लाख रू. की मांग कर रही है जबकि अनावेदक आवेदिका से 11 वर्ष छोटा है और विवाह योग्य उम्र से 04 वर्ष छोटा है। इस स्थिति में प्रकरण का निराकरण महिला आयोग के द्वारा किया जाना संभव नहीं है। आयोग में आवेदिका के आवेदन को मूलतः बाल संरक्षण आयोग में भेजने का आदेश आयोग ने किया क्योंकि अनावेदक नाबालिक है। इस आशय का पत्र भी बाल संरक्षण आयोग में महिला आयोग द्वारा भेजा जायेगा। साथ ही आवेदिका के आवेदन के निराकरण भी बाल संरक्षण आयोग द्वारा किया जायेगा।

एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक(पति) ने बिना तलाक लिए दूसरा विवाह कर लिया है। अनावेदक का कहना है कि आवेदिका उसके घर 05 महिना ही रही है। लाने का प्रयास किया गया समाज वालो ने अनावेदक को व्यवस्था कर दूसरी औरत रखने कहा तब उसने चूड़ी प्रथा से तलाकशुदा महिला से दूसरा विवाह कर लिया। वर्तमान में आवेदिका का पुत्र 03 वर्ष का है आवेदिका पिता के नाम पर बच्चे का आधार कार्ड बनवाना चाहती है लेकिन अनावेदक अपना आधार कार्ड नहीं दे रहा है। आयोग की समझाईश पर आधार कार्ड लाने की सहमति जताई। प्रकरण आगामी सुनवाई हेतु।

 

अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक दोनो बच्चों को अपने पास रख रखा है और आवेदिका को उनसे मिलने नहीं देता। विस्तृत काउंसलिंग के पश्चात् आयोग की समझाईश पर अनावेदक ने दोनो बच्चों को आवेदिका के पास रखना स्वीकारा। आयोग ने आदेशित किया कि अनावेदक 05 हजार रू. महिना आवेदिका को देगा और हर सप्ताह बच्चों से मिलने जायेगा और आवेदिका भी बच्चों को अपने दादा-दादी से मिलने देगी और बच्चों की परवरिश व पढ़ाई का ध्यान रखेगी। इस प्रकरण में आयोग द्वारा 1 वर्ष की निगरानी किया जायेगा इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।

 

एक प्रकरण के दौरान आवेदिका ने बताया कि उभय पक्ष आपस में पति-पत्नि है और उनका 10 वर्षीय पुत्र है। दोनो 01 वर्ष से अलग रह रहे है। दोनो पक्षों के मध्य सुलह की संभावना नहीं है ऐसी स्थिति में दोनो पक्षों को आपसी राजीनामा से न्यायालय में तलाक की सलाह दिया गया। साथ ही एग्रीमेंट में यह मुख्य रूप से उल्लेखित होगा कि 10 वर्षीय पुत्र आवेदिका के पास रहेगा समय-समय पर अनावेदक अपने पुत्र से मिल सकेगा जिसमें आवेदिका रोक-टोक नहीं करेगी। अपने बच्चे की परवरिश के लिए अनावेदक हर माह 5 हजार रू. आवेदिका के बैंक अकाउंट में जमा करेगा। बच्चे की पढ़ाई व अन्य खर्च भी अनावेदक वहन करेगा अनावेदक ने इस पर अपनी सहमति जताई। साथ ही अनावेदक को समझाईश दिया गया कि वह अन्य महिला से दूर रहे व कोई रिश्ता ना रखे। इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।

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Author: samachardoot

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