UK court declares fugitive businessman Vijay Mallya bankrupt | लंदन की हाईकोर्ट ने विजय माल्या को दिवालिया घोषित किया, भारतीय बैंक अब कर्ज वसूली के लिए आसानी से जब्त कर सकेंगी प्रॉपर्टी

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डिजिटल डेस्क, लंदन। लंदन हाईकोर्ट ने सोमवार को भारतीय भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को दिवालिया घोषित कर दिया। इस फैसले के बाद भारतीय बैंक विजय माल्या की संपत्तियों को जब्त कर बकाया ऋण की वसूली कर सकेंगी। भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में भारतीय बैंकों के एक कंसोर्टियम ने ब्रिटिश कोर्ट में माल्या के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। 

लंदन हाईकोर्ट के चांसरी डिवीजन की वर्चुअल हियरिंग में चीफ इंसॉल्वेंसीज और कंपनी कोर्ट जज माइकल ब्रिग्स ने कहा, ‘मैं डॉ माल्या को दिवालिया घोषित करता हूं’। भारतीय बैंकों के कंसोर्टियम का प्रतिनिधित्व कानूनी फर्म टीएलटी एलएलपी और बैरिस्टर मार्सिया शेकरडेमियन ने किया। विजय माल्या के बैरिस्टर फिलिप मार्शल ने दिवालिएपन के आदेश पर रोक लगाने और स्थगन की मांग की थी।

बैरिस्टर फिलिप मार्शल ने कोर्ट से कहा कि जब तक कि भारतीय अदालतों में मामला पेंडिंग तब तक दिवालिएपन के आदेश पर रोक लगा दी जाए। लेकिन जज ने इन अनुरोधों को ठुकरा दिया। जज ने साफ तौर पर कहा कि इस बात के सबूत नहीं हैं कि माल्या बैंकों को सही समय में पूरे पैसे वापस कर देगा। इसके अलावा दिवालियापन आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगने वाला एक आवेदन दिया गया था। जज ब्रिग्स ने इसे भी ठुकरा दिया।

इस केस में कौन है याचिकाकर्ता?
इस मामले में याचिकाकर्ताओं में 13 बैंकों का एक कंसोर्टियम शामिल है। इसमें एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, कॉर्पोरेशन बैंक, फेडरल बैंक लिमिटेड, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ  मैसूर, यूको बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और जेएम फाइनेंशियल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड। याचिकाकर्ताओं में एक एडिशनल क्रेडिटर भी शामिल था।

बता दें कि माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस (जो अब बंद हो चुकी है) के लिए एसबीआई और दूसरे बैंकों से 9,990 रुपये का लोन लिया था। माल्या यह पैसा बैंकों को नहीं लौटा सका और 2 मार्च 2016 को भारत छोड़कर लंदन पहुंच गया। ये लोन अब इंटरेस्ट और कंपाउंड इंटरेस्ट को जोड़कर काफी ज्यादा गया है। 25 जून, 2013 की तारीख से 11.5 प्रतिशत के हिसाब से कंपाउंड इंटरेस्ट जोड़ा गया है।

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Author: samachardoot

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