रायगढ़। बरमकेला तहसील के अंतर्गत कटंगपाली गांव में रहने वाले दलित किसान के द्वारा तहसील ऑफिस के सामने जहर सेवन कर जान देने की कोशिश के बाद उसे अस्पताल ले जाने के दौरान उसकी मृत्यु हो जाने के मामले में तूल पकड़ लिया है। एक तरफ जहां भाजपा नेताओं ने दलित किसान के द्वारा आत्महत्या किये जाने के मामले को दुखद बताते हुए निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग उठाई है तो दूसरी ओर मामले को तूल पकड़ते देख जिला प्रशासन को भी इस मामले में सफाई देनी पड़ रही है।
उल्लेखनीय रहे कि जिले के बरमकेला तहसील के अंतर्गत आने वाले कटंगपाली गांव के एक दलित किसान युवक बैरागी मिरी ने सोमवार को बरमकेला तहसील ऑफिस के सामने जहर पीकर जान देने का प्रयास किया। जिसे अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में उसकी मृत्यु हो गई। बताया जा रहा है कि जमीन संबंधी मामलों के निराकरण के लिए मृतक बैरागी मिरी पिछले कई दिनों से तहसील ऑफिस के चक्कर लगा रहा था और इसी मामले को लेकर क्षुब्ध होकर उसने तहसील ऑफिस के सामने ही जहर पी लिया था। दलित किसान युवक की मृत्यु के बाद जहां इस घटना से जिले का दलित समाज उद्धेलित हो गया है। वहीं भाजयुमो नेता विकास केडिया ने इस घटना को दुखदः बताते हुए मृतक के परिजनों से मिलने के बाद मृतक के परिवार को सांत्वना देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय नही मिलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। तो वहीं जिला भाजपा अध्यक्ष उमेश अग्रवाल ने भी इस घटना पर तीखी प्रक्रिया देते हुए प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस तरह की घटना निंदनीय है और जिला प्रशासन को इस पूरे मामले में न्यायिक जांच कराने की जरूरत है। वहीं दलित युवक द्वारा आत्महत्या करने का मामला तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन ने भी इस मामले में अपनी सफाई प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जारी की है। जिसमें कहा गया है कि रायगढ़ जिले के कटंगपाली निवासी बैरागी मिरी ने संयुक्त खाते की पैतृक भूमि के विक्रय का गलत तरीके से सौदा करने तथा इसमें विफल रहने के कारण उत्पन्न तनाव के चलते जहर का सेवन कर आत्म हत्या कर ली। इस बात का खुलासा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सारंगढ़ ने अपने प्रतिवेदन में किया है। एसडीएम ने बैरागी मिरी के द्वारा जहर का सेवन करने के संबंध में नायब तहसीलदार बरमकेला तथा हल्का नंबर तीन के पटवारी शैलेन्द्र पटेल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर रायगढ़ को प्रेषित प्रतिवेदन में इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि बैरागी मिरी अपने स्वर्गीय पिता भोजराम के नाम पर धारित भूमि रकबा 0.704 हेक्टेयर को सिर्फ अपने नाम पर फौती कटाने के लिए प्रयासरत था। वह पैतृक भूमि के फौती से अपनी बहनों, मृत भाई की पत्नी एवं उसकी पुत्री के नाम को विलोपित करना चाह रहा था, जो कि विधि सम्मत न होने की वजह से सम्भव नहीं था।
इस संबंध में पटवारी शैलेन्द्र पटेल ने एसडीएम सारंगढ़ को प्रस्तुत अपने प्रतिवेदन में इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि संयुक्त खाते की पैतृक जमीन को अवैधानिक तरीके से विक्रय कराने के लिए भूमि दलाल भुनेश्वर खुटे एवं धनसिंह ने क्रेता श्री माधव मिरी से पांच लाख रूपए लिए और मृतक बैरागी मिरी को एक लाख रूपए देकर उसे यह भरोसा दिलाया कि पैतृक भूमि से उसकी बहन एवं अन्य भाई के वंशज का नाम विलुप्त कराकर केवल मृतक बैरागी मिरी के नाम से फौती दुरूस्त कराकर जमीन की बिक्री करवा देंगे। फौती सिर्फ अपने नाम से कटवाने की विधि सम्मत प्रक्रिया का पालन मृतक बैरागी मिरी द्वारा नहीं किया गया। फौती से अपनी बहनों एवं मृत भाई के वैध वारिसान के नाम को विलोपित करने के संबंध में मृतक द्वारा दिए गए आवेदन के संदर्भ में नायब तहसीलदार द्वारा उसे उप पंजीयक कार्यालय से विधिवत अन्य वारिसान का सहमति के आधार पर हक त्यागनामा प्रस्तुत करने की समझाईश दी गई थी। मृतक बैरागी मिरी इसके बाद न तो नायब तहसीलदार के न्यायालय में उपस्थित हुआ, न ही न्यायालय में कोई आवेदन दिया है। इसी बीच दलालों के माध्यम से रकबा 0.168 हेक्टेयर भूमि के क्रय का सौदा करने वाले श्री माधव मिरी द्वारा सौदे की भूमि पर मिट्टी पाटने के साथ ही कब्जा किया जा रहा था। सौदे की भूमि के विक्रय में विफल रहने तथा सौदे के रूप में प्राप्त राशि को लौटाने की असमर्थता के कारण उत्पन्न तनाव के चलते बैरागी मिरी द्वारा सोमवार 2 अगस्त को बरमकेला तहसील ऑफिस के सामने जहर का सेवन कर लिया। बैरागी मिरी को आनन-फानन में बरमकेला हॉस्पिटल ले जाया गया, परंतु अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मृत्यु को गई।









