इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत दो दिनी इंदौर प्रवास के बाद दिल्ली रवाना हो गए। उन्होंने मालवा प्रांत में जारी संघ से जुड़ी गतिविधियों को लेकर पदाधिकारियों से अनौपचारिक चर्चा की, लेकिन कोई बैठक नहीं की।
दो दिन में उन्होंने नए उद्यमियों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों से ज्यादा चर्चा की। शहर के एक संगठन के पदाधिकारियों से उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को भटकाव से बचाना है तो शिक्षा को बढ़ावा दें, खासकर बच्चियों की शिक्षा पर ज्यादा जोर देना चाहिए। अज्ञानता के कारण लव जिहाद जैसी घटनाएं होती हैं।
भागवत ने दो दिन के प्रवास पर शिक्षाविदों से ज्यादा बात की और मिलने वालों से बोले कि संघ की गतिविधियों को लेेकर जिसके पास भी कुछ जिज्ञासा है, तो खुलकर पूछें। उन्होंने कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने ज्यादातर बातें युवा पीढ़ी को ध्यान में रखकर ही कही।
वैज्ञानिक हैं गायत्री मंत्र और सूर्य नमस्कार
– आजकल युवा तर्कों पर ज्यादा विश्वास रखते हैं। उन्होंने गायत्री मंत्र और सूर्य नमस्कार के उदाहरण देते हुए कहा कि मंत्र बोलना और सूर्य नमस्कार के पीछे भी कई वैज्ञानिक तथ्य हैं। यदि युवा इसे जानेंगे तो फिर उनकी भ्रांति दूर होगी।
– हमारे राष्ट्र की भौगोलिक सीमाएं दूर दूर तक फैली थीं। हमारी संस्कृति दूसरे राष्ट्रों से ज्यादा समृद्ध है, लेकिन सैकड़ों सालों से हुए आक्रमणों ने उसे खंडित करने की कोशिश की। हमें एकजुट रहना होगा।
– संघ का स्वयंसेवक राष्ट्र निर्माण के लिए सतत कार्य करता है। बेहतर समाज के निर्माण के लिए लगातार काम होते हैं।
(जैसे भागवत ने युवा उद्यमियों व शिक्षाविदों से चर्चा में कही)








