बिलासपुर। Bilaspur Cims News: संभाग के सबसे बड़े अस्पताल का हाल बेहाल चल रहा है। आधे से ज्यादा चिकित्सीय उपकरण खराब चल रहे हैं, जिससे मरीज उपचार से वंचित हो रहे हैं। वही छोटे कर्मियों को काम करने मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। सिम्स की मैकेइजनाइज्ड लांड्री बीते दो साल से खराब है, जिस ओर कोई भी सुध नहीं लिया जा रहा है। ऐसे में लांड्री कर्मी रोजाना हाथ से सैकड़ों कपड़े धो-धोकर परेशान हो गए हैं।
सिम्स 750 बेड का अधिकृत अस्पताल है। ऐसे में रोजाना धुलने के लिए सैकड़ों कपड़े निकलते हैं। बड़े स्तर पर कपड़ा की धुलाई कर्मियों से संभव नहीं हो सकने की वजह से ही शासन स्तर पर लाखों रुपये की मैकेइजनाइज्ड लांड्री की सुविधा सिम्स को दी गई, ताकि कर्मचारियों पर ज्यादा कपड़ा धोने का दबाव न हो। साथ ही कपड़े पूरी तरह से हाईजेनिक धूलकर बाहर निकले और वायरस वही खत्म हो जाए। लेकिन, सिम्स की बदइंतजामी से मैकेइजनाइज्ड लांड्री की तमाम मशीनें भी दो साल पहले बंद पड़ गईं। इसके बाद इसमे सुधार करवाने की जहमत भी नहीं उठाई गई।
ऐसे में कपड़ा धोने वाले कर्मचारियों को हाथ से ही कपड़ा धोने के लिए विवश होना पड़ रहा है। हर दिन इस कर्मचारियों को कम से कम 600 चादर, टेबल क्लाथ, पर्दे के साथ डॉक्टरो के एप्रॉन तक धोने पड़ रहे हैं। कर्मचारियो ने सिम्स प्रबंधन से बार—बार लांड्री की मशीन बनवाने की बात रख चुके हैं। इसके बाद भी इसे नहीं बनवाया जा रहा है। ऐसे कर्मचारियो को ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है। साथ ही कपड़े मापदंड के अनुरूप नहीं धूल पा रहे हैं।
नई मशीन का बना है प्रस्ताव
सिम्स प्रबंधन ने कपड़ा सफाई की क्षमता बढ़ाने के लिए लांड्री में नई मशीन लगाने का प्रस्ताव बनाया है। इसे स्वीकृति के लिए शासन स्तर पर भेजा गया है। लेकिन, इस प्रस्ताव को शासन भी स्वीकृत नहीं कर रहा है, क्योंकि पुरानी मशीनें काम करने के लायक है। इन सब के बाद भी सिम्स प्रबंधन मशीन की मरम्मत नहीं करा रहा है।








