चंद रुपये बचाने के चक्कर में लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार करने के बजाय अपनी जिम्मेदारियों से पूर्वी बिहार की खाकी अपना मुंह मोड़ रही है। पोस्टमार्टम कराने के बाद लावारिश लाशों को पुलिस मायागंज अस्पताल के मोर्चरी में 72 घंटे तक रखवाने के बाद पुलिस फिर अंतिम संस्कार कराने के लिए वापस नहीं आती है।
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इससे इन लाशों को अंतिम संस्कार मयस्सर नहीं हो पाता है और अस्पताल प्रशासन अपने तय तरीके से लावारिश लाशों का डिस्पोजल करा देता है। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में पूर्वी बिहार के करीब आधा दर्जन जिले व झारखंड के एक जिले में मिली लावारिश लाशों का पोस्टमार्टम (पीएम) कॉलेज के एफएमटी विभाग के चिकित्सकों द्वारा किया जाता है।
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एफएमटी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संदीप लाल कहते हैं कि यहां पर पूर्णिया, खगड़िया, भागलपुर जिले की नवगछिया पुलिस जिला, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज, बांका के अलावा झारखंड के गोड्डा जिले में मिली लावारिश लाशों का पोस्टमार्टम कराने के लिए वहां की पुलिस लेकर आती है। इन लाशों का पोस्टमार्टम करने के बाद संबंधित पुलिस को दे दिया जाता है।
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मायागंज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. असीम कुमार दास ने बताया कि मायागंज अस्पताल के मोर्चरी में हर माह औसतन 10 से 12 की संख्या में लावारिश लाशें यहां पर रखने के लिए आती हैं। ये लावारिश लाशें पहले से ही सड़ी होती हैं। उस पर पोस्टमार्टम करने के बाद ये लाशें और भी क्षत-विक्षत हो जाती हैं। ऐसे में इन लाशों को संभालकर अस्पताल के मोर्चरी में रखना होता है।
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पुलिस यह कहकर रखवाकर जाती है कि वह 72 घंटे बाद आयेगी और इन लाशों का अंतिम संस्कार करने के लिए ले जाएगी, लेकिन एक बार रखवाने के बाद पुलिस फिर वापस नहीं आती है। ऐसे में इन लाशों का डिस्पोजल हमें ही कराना पड़ता है। जबकि हम पुलिस को लावारिश लाशों का अंतिम संस्कार करने के लिए एंबुलेंस तक देने को तैयार हैं।









