सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन्होंने कोरोना में अपने करीबियों और रिश्तेदार खोए हैं, लेकिन वे अभी भी मुआवजे की योजना के बारे में नहीं जानते हैं। इसके लिए सरकारों को व्यापक प्रचार करना चाहिए।
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साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ऐसा सिस्टम भी बनाना चाहिए, जहां लोग मुआवजे के लिए ऑनलाइन दावा कर सकें। कोर्ट के इस सवाल पर गुजरात सरकार की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि दो हफ्ते में एक ऑनलाइन पोर्टल बना दिया जाएगा। इस पोर्टल पर भी कोरोना से हुई मौत के मामलों में मुआवजे का दावा किया जा सकेगा।
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कोर्ट इस मुद्दे पर असंतुष्ट था कि गुजरात, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा जैसे कोरोना प्रभावित राज्यों ने भी नोटिस के बावजूद अब तक इस मुआवजा नहीं दिया है, न ही अन्य योजनाओं के बारे में केंद्र सरकार को कोई जानकारी दी है।
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कोर्ट ने देखा कि इन उनके यहां मुआवजा लेने वालों की संख्या बहुत कम है। कोर्ट ने कहा कि इसका कारण साफ है कि इस मामले का कोई प्रचार नहीं किया जा रहा है।
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गौरतलब है कि कोर्ट के आदेश पर केंद्र और राज्य सरकार कोरोना से मरने वालों के परिजनों को 50 हजार रु का मुआवजा देने के लिए तैयार हो गई थी।
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इस श्रेणी में उन लोगों को भी शामिल किया गया था, जिन्होंने कोरोना के कारण 48 घंटों में आत्महत्या कर ली थी। मामले में अगली सुनवाई सोमवार को होगी।









