छत्तीसगढ़ के सूरजपुर शहर से लगे पर्री गांव में कई दिनों से लगातार तीन भालू आ रहे हैं। शुक्रवार को वन विभाग की टीम ने भालुओं को पकड़ने रेस्क्यू अभियान चलाया।
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गांव के एक घर में रखे पिंजरे में एक भालू कैद हो गया, लेकिन भालू को वहां से निकाला नहीं जा सका। मादा भालू की जिद के आगे वन विभाग को पिंजरे में कैद भालू के बच्चे को छोड़ना पड़ा।
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बारह घंटे तक उसकी मां पिंजरे के आसपास ही मंडराती रही। मां की ममता और उसके उग्र तेवर को देखकर वन अफसरों व कर्मियों को आखिरकार हार माननी पड़ी। अंतत: वन विभाग की टीम ने पिंजरा खोल दिया, जिसके बाद मादा भालू दोनों बच्चों को लेकर जंगल की ओर चली गई।
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डीएफओ बीएस भगत ने बताया कि सूरजपुर से लगे पर्री गांव में एक व्यक्ति के बाड़े में रेडी टू ईट का प्लांट है। भालू अपने दो बच्चों के साथ रात को वहां आते थे और गुड़, चना और मूंगफली का दाना खाकर वापस लौट जाते थे।
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वन्यप्राणियों की सुरक्षा और किसी तरह की हिंसा से बचने भालुओं को पकड़ने प्लांट में ही पिंजरा लगाया गया था। कई घंटों की मशक्कत के बाद सफलता मिली और तीन में से एक भालू पिंजरे में कैद हो गया, जबकि दो भालू बंद पिंजरे के इर्द-गिर्द घूमते रहे।
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पिंजरे में कैद भालू की आवाज की वजह से बाहर घूम रहे भालू लगातार पिंजरा को खोलने का प्रयास करते रहे। भालुओं के आक्रोश को देखते हुए अंतत: पिंजरा खोलना पड़ा। डीएफओ ने बताया कि भालुओं को पकड़ने फिर रेस्क्यू अभियान चलाया जाएगा।
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स्थानीय निवासी महेंद्र पांडेय ने बताया कि भालू पिछले कई दिनों से गांव में आ रहे थे, जिससे ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीणों ने वन विभाग को आवेदन भी दिया है। वन अमले ने भालुओं को पिंजरे में कैद करने की योजना बनाई गई। पर्री गांव के उसी घर की बाड़ी में रात को एक पिंजरा लगाया गया।
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पिंजरे में भालू के पसंदीदा आहार को रखा गया था। रात को भालू आए, लेकिन पिंजरा में सिर्फ एक भालू ही कैद हो पाया। महेंद्र पांडेय ने बताया कि वन अमले ने दिनभर भालू को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ने का प्रयास किया, लेकिन दो अन्य भालू वहां से हटे ही नहीं। पिंजरा खोलने के बाद तीनों भालू फिर जंगल की तरफ चले गए।








