आज रात पृथ्वी से करीब 19 लाख किलोमीटर की दूरी से एक विशालकाय एस्टेरॉयड गुजरेगा। हालांकि एक किलोमीटर लंबे इस एस्टेरॉयड से पृथ्वी को कोई खतरा इस बार नहीं है। पर वैज्ञानिकों ने इस एस्टेरॉयड को पहले से ही पृथ्वी के लिए संभावित खतरे की श्रेणी में शामिल किया है।
आज से पहले यह एस्टेरॉयड करीब 89 साल पहले 17 जनवरी 1933 को पृथ्वी के करीब से गुजरा था। दुनिया भर के खगोलीय वैज्ञानिक इसका अध्ययन लंबे समय से कर रहे हैं। यह एस्टेरॉयड करीब 70 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।
नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के पब्लिक आउटरीच कार्यक्रम प्रभारी डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया कि इस एस्टेरॉयड का नाम 1994 पीसी है। यदि आसमान साफ रहा तो 18 जनवरी को तड़के सुबह दो बजे से लेकर तीन बजकर 20 मिनट पर यह आसमान में बेहद चमकीली रोशनी के रूप में गुजरता हुआ नजर आएगा।
दूरबीन की मदद से इसका सबसे साफ दृश्य उपलब्ध होगा, जबकि खुली आंखों से यह सामान्य टूटते तारे जैसा नजर आएगा। बताया कि पहली बार 1994 में ऑस्ट्रेलिया के खगोल शास्त्री ने इसे खोजा था। वैज्ञानिक गणना के अनुसार 18 जनवरी 2105 को यह एस्टेरॉयड दोबारा पृथ्वी के करीब आएगा।









