राजनीतिक दलों ने शुरू की प्रत्याशियों की जासूसी, पार्टी हाईकमान को पल-पल की रिपोर्ट देते हैं ‘जेम्सबांड’

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यूपी में जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आती जा रही हैं। वैसे-वैसे राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों की जासूसी करानी शुरू कर दी है। इसके लिए पार्टियों के ‘जेम्सबांड’ उनके पीछे लगा दिए गए हैं। वजह अधिकांश प्रत्याशियों का दल बदल कर चुनाव मैदान में होना है। जेम्स बांड की नजरें प्रत्याशियों के प्रचार पर लगी रहती हैं। घर से निकलने से लेकर क्षेत्र में चुनाव प्रचार करने और मिलने वाले लोगों तक पर उनका फोकस रहता है।

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जिले की नौ विधानसभा सीटों पर भाजपा, बसपा, सपा-रालोद गठबंधन और कांग्रेस के 36 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें भाजपा ने पांच सीटों पर अपने वर्तमान विधायकों का टिकट काटकर नए प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे हैं। पार्टी द्वारा टिकट कटने से नाराज विधायकों को संगठन स्तर पर मना तो लिया गया है, लेकिन चुनाव में कहीं भी किसी तरह का भीतरघात न हो सके, इसके लिए उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए संगठन के ही कुछ ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दे दी गई है। इसकी सारी रिपोर्ट पार्टी हाईकमान को भेजी जा रही है।

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सपा-रालोद गठबंधन में चार प्रत्याशी अन्य दलों से आए हैं। वहीं तीन प्रत्याशी राजनीति के नए खिलाड़ी हैं। ये चुनाव में कहीं भटक न जाएं। उनके चुनाव प्रचार का तरीका क्या है। कौन से मुद्दे उठा रहे हैं। गठबंधन में होने के कारण दोनों दलों की बातें जनता तक पहुंचा रहे हैं कि नहीं। प्रत्याशियों पर निगरानी रखने के लिए इन बिंदुओं पर जेम्सबांडों का फोकस रहता है।

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बसपा में भी यही स्थिति है। बसपा के दो प्रत्याशी अन्य दलों से शामिल होने के बाद चुनाव मैदान में हैं। पांच प्रत्याशी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। दो पुराने कार्यकर्ता ही चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस में कोई ऐसा प्रत्याशी नहीं है जो किसी दल आकर शामिल हुआ हो, लेकिन दो प्रत्याशियों को छोड़कर सभी नए हैं। इसलिए पार्टी की ओर से इनकी भी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। ये भी देखा जा रहा है कि प्रियंका गांधी की प्रतिज्ञाओं के बारे में वह जनता को रूबरू करा रहे हैं कि नहीं।

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प्रत्याशियों की जासूसी कराए जाने के संबंध में जब चारों दलों के जिम्मेदार पदाधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ऐसा हो रहा है। इस बार के चुनाव में कभी भी कुछ हो सकता है। कोई भी दल खतरा मोल नहीं लेना चाहता है। इसलिए प्रत्याशी की हर गतिविधि का पता रखना जरूरी है। उसी के अनुसार रणनीति भी बदलनी पड़ती है।

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Author: samachardoot

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