टाइगर की खाल कुत्ते की निकली: वाइल्ड लाइफ स्मगलिंग का मामला डीएनए रिपोर्ट में झूठा निकला……

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मध्य प्रदेश में जंगली जानवरों के अंगों की तस्करी करने वाले वाइल्ड लाइफ स्मगलिंग होती है लेकिन कई बार पुलिस और फॉरेस्ट विभाग गलत ढंग से लोगों को फंसा देते हैं। ऐसा ही एक मामला छिंदवाड़ा में सामने आया है जहां पुलिस व वन विभाग ने चार लोगों को टाइगर की खाल बेचने के आरोप में पकड़ा था लेकिन जब स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ जबलपुर की रिपोर्ट आई तो वह कुत्ते की खाल निकली।

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अब वाइल्ड स्मगलिंग के नाम पर जिन चार आरोपियों को बदनामी का दाग लगा उन्हें अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है लेकिन सरकारी विभागों के खिलाफ वे कानूनी कार्यवाही शुरू करने जा रहे हैं.

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बताया जाता है कि पांच साल पहले 22 जुलाई 2017 को छिंदवाड़ा में चार आरोपियों गुरैया रानीकामठा में पुलिस व वन विभाग की टीम ने टाइगर की खाल बेचने के संदेह पर गिरफ्तार किया था। इनमें एक भाजपा के वरिष्ठ नेता नारायण सकरवार के बेटे अभिजीत उर्फ मटरू थे तो दूसरे कानून की पढ़ाई करने वाले राजेश विश्वकर्मा भी थे।

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इनके अलावा दो मजदूर संदीप उर्फ मोनू व रामकुमार थे। इनके पास से खाल जप्त होने पर उन्हें जेल भेज दिया गया था और करीब एक महीने तक वे जेल में रहे थे।

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पुलिस और वन विभाग की टीम ने जिस टाइगर की खाल के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया था, उसकी स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ एंड हेल्थ जबलपुर ने तीन महीने बाद ही अक्टूबर 2017 में रिपोर्ट पुलिस अधीक्षक को भेज दी थी। इस रिपोर्ट में टाइगर की खाल से इनकार करते हुए कहा गया है कि खाल कुत्ते की थी।

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मगर इस रिपोर्ट के अदालत में पेश नहीं किए जाने से अदालत आरोप फ्रेम नहीं कर पा रही थी। पिछले दिनों जब पुलिस ने अदालत में इस रिपोर्ट को पेश किया तो आरोपियों के वकील सतीश श्रीवास ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त करने का अदालत में तर्क पेश किया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।

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Author: samachardoot

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