रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग में फंसे भारतीय छात्रों की वापसी शुरू हो गई है। रविवार को पटना पहुंचे ज्यादातर छात्र यूक्रेन के प्रमुख शहर चेरनवित्सी से जान बचाकर निकले थे।
कोई मेडिकल दूसरे वर्ष का छात्र था तो कोई तीसरे वर्ष का। पिछले एक हफ्ते से वे यूक्रेन से निकलने की जुगत में थे लेकिन रूसी युद्धक विमानों की बमबारी की दहशत से सभी डरे थे। छात्रों ने बताया कि पल-पल सोशल मीडिया पर आ रहे संदेश डरा रहे थे।
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गोलियों से छलनी वाहनों की तस्वीरें बार-बार निकलकर भागने को उकसा रहीं थीं, लेकिन बम धमाकों की गूंज से हिम्मत जवाब दे रही थी। यूक्रेन से भारत पहुंचने में तिरंगा उनका रक्षा कवच बना।
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चार दिन पहले जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो खाने-पीने के सामान को इकट्ठा करने की भीड़ जमा हो गई। देखते-देखते सुपर मार्केट खाली हो गये। कैश की डिमांड की जा रही थी लेकिन एटीएम काम नहीं कर रहे थे। फिर छात्रों ने रोमानिया बॉर्डर निकलने की ठानी लेकिन पैसे की कमी सामने आ रही थी।
जब तक आने का मन बनाते तब तक मौत सिर पर मंडराने लगी थी। फिर सबने दूतावास से संपर्क किया। सरकार के दबाव के बाद दूतावास के वाहनों से छात्रों का समूह चेरनवित्सी से 40 किमी दूर रोमानिया बॉर्डर तक का सफर किया।
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यूक्रेन से लौट रहे बिहार के छात्रों का स्वागत करने रविवार को पटना एयरपोर्ट पर उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, जल संसाधन मंत्री संजय झा तथा उद्योग मंत्री शाहनवाज हुसैन पहुंचे थे।
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उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हम सब छात्रों के स्वागत के लिये आये हैं। सभी छात्र सकुशल लौटें, इस दिशा में केंद्रीय स्तर पर काम हो रहा है। बिहार और केंद्र मिलकर बिहार के छात्रों की सकुशल वापसी कराएगी। अब तक 273 बिहारी छात्रों के वहां फंसे होने की बात सामने आ रही है।
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मोतिहारी का मेडिकल छात्र आशीष गिरि रविवार दोपहर जैसे ही अपने घर पहुंचा। उसकी दादी बृजापति देवी घर से दौड़-दौड़े आयीं और पोते से लिपटकर रो पड़ीं। आशीष ने अपनी दादी का चरण स्पर्श कर वतन आगमन की खुशी में आशीष लिया। बेटे को सामने देख मां पूनम गिरि भी अपने आंसू नहीं रोक सकीं। अपने पुत्र की आरती उतार माथे पर तिलक लगा आशीर्वाद दिया। दादा उदयानंद गिरि, पिता मुन्ना गिरि की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। पिता ने बताया कि यूक्रेन में युद्ध की सूचना से परिवार के लोग बेचैन हो गए थे। परिवार के लोग पुत्र के आने को लेकर खाना-पीना तक छोड़ दिये थे। अपने पुत्र की वापसी के लिए गिरि ने भारत सरकार समेत पीएम नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया।
छात्रों को दूतावास से स्पष्ट संदेश था कि जो भी भारतीय जिस वाहन से निकले, उस पर तिरंगा चिपकाकर निकले। छात्रा रीमा ने बताया कि कई छात्र तिरंगा ओढ़कर बॉर्डर पार कर रहे थे। तिरंगे का सम्मान भी हर जगह दिखा। रीमा के पिता तारापुर के विधायक हैं। बेटी को सकुशल पाकर खुश दिखे। मधेपुरा के सतीश ने बताया कि हमारे लिये तिरंगा रक्षा कवच की तरह रहा। रास्ते में यूक्रेन के सैनिक भी मिले, जिन्हें अंग्रेजी आती थी वे छात्रों से संवाद कर जांच भी कर रहे थे। रोमानिया बॉर्डर पर भारतीयों के लिये यूक्रेनी सैनिक एक ही वाक्य कह रहे थे-आर यू इंडियन, गो सेफली, सेफ फ्लाइट…।









