खारकीव में हालात बद से बदतर हो गए हैं। यहां किसी भी वक्त हमले का डर सता रहा है। एंबेसी ने यहां से निकलने की हिदायत देते हुए एडवाजरी जारी कर दी है। बॉर्डर पर आने के लिए कहा जा रहा है। लाख कोशिशों के बाद भी टैक्सी या बस मेट्रो स्टेशन तक के लिए भी नहीं मिल रही है।
अब हम करीब 20 छात्र-छात्राएं अपने रिस्क पर ही पैदल स्टेशन की ओर निकल पड़े हैं। फोन के नेटवर्क यहां बिल्कुल नहीं हैं, इसी वजह से वीडियो कॉल करना भी मुमकिन नहीं है। यदि मेरा फोन न मिले तो समझना हमें ट्रेन मिल गई है। आप परेशान न होना, दुआ करना, हम महफूज पहुंच जाएंगे। बॉर्डर पर पहुंचकर आपको फोन करेंगे।
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दून के माजरा के रहने वाले जफर खान और रईसा खान की बेटी गजाला खान नेशनल मेडिकल विवि में एमबीबीएस कर रही है। मंगलवार दोपहर करीब दो बजे (यूक्रेन में साढ़े दस बजे) की बेटी गजाला खान का फोन आया था। इधर अम्मी, अब्बू समेत पूरा परिवार परेशान है।
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बेटी वहां के हालात बयां करती हैं और परिवार को फिक्र न करने के लिए कहती है। रईसा खान ने बताया कि बेटी ने कहा कि एंबेसी ने एडवाजरी जारी कर यहां न रुकने को कहा है। यहां हर पल खतरा बना है। वे पिछले कई दिनों से बंकर में शरण लिए हैं। उनके साथ करीब 20 छात्र-छात्राएं थे, सभी ने तय किया कि अपने रिस्क पर ही निकल लिया जाएं। सामान बांधकर वो स्टेशन की ओर पैदल निकल गए हैं।
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वहां से रोमानिया या अन्य किसी सुरक्षित बॉर्डर पर जाएंगे। बताया जा रहा है कि वहां पर शेल्टर हैं, उनमें रुकेंगे। दो दिन से नहीं देखी बेटी की सूरत :रईसा खान ने बताया कि खारकीव में नेटवर्क के बुरे हाल हैं। दो दिन से वीडियो कॉल नहीं हो सकी है। यहां दुआओं का सिलसिला जारी है। अल्लाह सभी बच्चों को सुरक्षित वहां से निकाल दे।
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पापा! यहां खारकीव में हालात बहुत खराब हो गए हैं। गोलीबारी, बमबारी होने लगी है, सबको यहां से निकलने के लिए कहा गया है। मै भी अपने दोस्तों के साथ ट्रेन में बैठकर निकल गया हूं। रोमानिया बार्डर पर जाएंगे और वहां से वतन वापसी होगी। कोरोनेशन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डा. डीपी जोशी के बेटे से मंगलवार को सुबह बात हुई।
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उन्होंने अपने पापा से बताया कि यहां पर ताबड़तोड़ फायरिंग और गोलाबारी हो रही है। वह बंकरों से निकलकर ट्रेन से निकल गए हैं। रोमानिया बार्डर पहुंचेंगे। रास्ते में हैं, बाद में बात करता हूं। जब पहुंच जाऊंगा तो बता दूंगा। आप परेशान न होइये।
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खारकीव में भारतीय छात्र की मृत्यु से यूक्रेन में रहे भारतीय मूल के लोगों और छात्रों में भय पसर गया है। सभी दुआ कर रहे हैं कि बस किसी तरह यूक्रेन की सीमा से निकल कर सुरक्षित दूसरे देश चले जाएं। पोलैंड सीमा पर गैर यूक्रेनी लोगों की भीड़ जमा है। पिछले पांच दिन से कीव, लवीव में फंसे उत्तराखंड के छात्रों समेत 20 लोगों का दल मंगलवार दोपहर पोलैंड सीमा पहुंच गया।
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दून के अभिनव चौहान बताते हैं कि पोलैंड बॉडर पर भी वाहनों का हुजूम लगा है। अब लोगों को बस उतरने से नहीं दिया जा रहा है। वाहनों को ही सीमा से बारी-बारी से बाहर ले जाया जा रहा है। अभिनव बताते हैं कि खारकीव की घटना की वजह से दुख का माहौल है। खारकीव इस वक्त वार जोन में है।
मालूम हो कि दून के अभिनव चौहान और शिप्रा चौहान समेत 450 से ज्यादा भारतीय दो दिन पहले तक कीव में फंसे हुए थे। कीव पर रूसी हमला बढ़ने पर जैसे-तैसे कर वो लोग वहां लवीव व अन्य शहरों को पहुंचे। अभिनव बताते हैं कि सभी लोग सुरक्षित दूसरे देशों की सीमा में शरण मिलने की दुआ कर रहे हैं।








