छतीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क वन्य प्राणियों के लिए कब्रगाह बन गया है। यहां वन्य जीवों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार की सुबह 10:30 बजे फिर एक नर भालू की मौत हो गई। चार साल के नर भालू की मौत भी संदिध परिस्थियों में हुई है।
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एक महीने के भीतर कानन पेंडारी में वन्य जीव की यह चौथी मौत है। लगातार मौतों से पार्क प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।
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कानन पेंडारी की बदहाल व्यवस्था के कारण एक के बाद एक वन्य प्राणियों की मौत होती जा रही है। कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क के अधिकारियों को समझ में ही नहीं आ रहा है कि आखिर एक के बाद एक वन्य जीव मर क्यों रहे हैं। लगातार दो भालुओं की मौत के बाद अब वर्तमान ने 8 भालू बचे हैं, जिन्हें ऐहतियातन अलग-अलग केज में रख दिया गया है।
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पर्यटकों से भी दूर रखा जा रहा है। भालू की मौत की वजह कानन के डॉक्टरों की टीम को भी नहीं मालूम है। कानन पेंडारी प्रबंधन ने इसके लिए वाइल्डलाइफ एसओएस के डॉक्टर इलियाराजा से संपर्क साधा है। मिलों दूर बैठे डॉक्टर ने आशंका जाहिर की है कि भालू की मौत कैनाइन हेपेटिटी संक्रमण से हो सकती है।
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डॉक्टर इलियाराजा ने आईवीआर बरेली भेजने के निर्देश दिए है। चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम के बाद भालू के शव का अंतिम संस्कार कानन पेंडारी में शाम होने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों के निगरानी में किया गया।
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गुरुवार को हुई भालू की मौत से कानन पेंडारी जूलॉजिकल गार्डन के प्रबंधन पर सवालिया निशान लग गया है। एक महीने के भीतर वन्यजीव की यह चौथी मौत है, जिसने प्रबंधन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है।
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कानन पेंडारी में सप्ताहभर पहले एक बाघिन की मौत हुई थी। वहीं 10 दिन पहले भी एक भालू की मौत हुई थी। इसके पहले गर्भवती हिप्पोपोटोमस (दरियाई घोड़ा) की मौत हुई थी।
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दरियाई घोड़ा की पीएम रिपोर्ट अभी आई भी नहीं है कि फिर एक मौत हो गई। वन्यजीवों की लगातार हो रही मौतों से कानन पेंडारी प्रबंधन सकते में है। कानन के अधिकारी व छत्तीसगढ़ वन विभाग के अफसर भी किसी तरह का बयान देने से कतरा रहे हैं।









