रायगढ़. इन दिनों छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में कोतरा रोड़ थाने में घुसकर दो दिन पहले रायगढ़ विधायक प्रकाश नायक के पुत्र रितीक नायक तथा उसके साथियों द्वारा थाने में घुसकर वहां ड्यूटी पर तैनात सिपाही की जमकर पिटाई, गाली गलौज का मामला भले ही पंजीबद्ध हो गया है, लेकिन रायगढ़ पुलिस राजनीतिक दबाव के चलते पूरे मामले में ऐसी चुप्पी साध कर बैठ गई है जैसे कुछ हुआ ही न हो और उनके लिए यह मामला इतना सेंसेटिव है कि इंग्लिश का सेंसेटिव शब्द इसके आगे बौना साबित हो गया है।
इतना ही नही 24 घंटे से अधिक हुई इस वारदात के मामले में आरोपी विधायक पुत्र की गिरफ्तारी की योजना तक नही बनाई जा रही है जबकि उसी दिन विधायक पुत्र ने कोतरा रोड में पहले एक गरीब ड्राईवर की जमकर पिटाई की थी उसके बाद बकायदा थाने जाकर भी अपनी दंबगई दिखाते हुए पुलिस तक की पिटाई कर दी। सो रही पुलिस के बड़े अधिकारी भी इस मामले में इसलिए खामोश है कि मामला सेंसेटिव है और सरकार विधायक की है और विधायक पुत्र को अगर कुछ करते हैं तो वर्दी खतरे में आ जाएगी।
जानकार सूत्र बताते हैं ऐसे सैकड़ो मामले हैं जब पुलिस किसी महिला संबंधी अपराध को सुलझाने के लिए तत्काल विज्ञप्ति जारी करके अपने आपको तेज तर्रार सिंघम, दबंग जैसे शब्दों से अलंकृत करते हुए पत्रकारों से अपनी सेटिंग कर लेते हैं और पत्रकार भी ऐसे मामलों में कार्रवाई पर चारचांद लगा देते हैं और ऐसा ही तब होता है जब पुलिस के खिलाफ कोई गरीब या छोटा मोटा आदमी आवाज उठाता है तो उसके उपर ऐसे धारा लगती है जैसे वो उनके उपर ही लगाने के लिए बनी हो।
इतना ही नही सटोरियों, जुआरियों तस्करों के साथ-साथ भू-माफिया से सेटिंग करने वाली वर्दीधारी पुलिस अपने ही साथी की सरेआम पिटाई के मामले में खामोश हो जाती है। खामोश वो लोग भी हो जाते हैं जो अपनी राजनीति रोटी सेकने के लिए कभी मोंमबत्ती लेकर तो कभी बैनर लेकर सड़कों पर उतर जाते हैं, कि सरकार गरीबों पर अन्याय कर रही है, महिलाओं पर अत्याचार हो रहे हैं पुलिस सो रही है। लेकिन जब पुलिस का जवान मारा खाता है और पीटने वाला सरकार के विधायक पुत्र हो तो किसी की जुबान खुलना तो दूर कोई इस पर बात तक नही करना चाहता।
जमकर चर्चा है जनता के बीच पुलिस के अचानक सेंसेटिव शब्द की
रायगढ़ पुलिस की अपनी डिक्शनरी से निकाले गए एक शब्द की काफी चर्चा है। जिले के लोग जानना चाहते हैं कि आखिर रायगढ़ पुलिस इस शब्द को सही तरीके से डिफाइन कर रही है या हमने जो इसका अर्थ समझ था वह सही है। उस शब्द का नाम है सेंसेटिव । रायगढ़ पुलिस ने इस शब्द को नए ढंग से परिभाषित कर तमाम अंग्रेजीदानों को कंफ्यूज कर दिया है और यह इसलिये कि दो दिन पहले कोतरा रोड़ थाने में देर रात तक हंगामे के साथ-साथ गाली गलौज व एक वर्दीधारी आदिवासी सिपाही की जमकर पिटाई का।
दरअसल रायगढ़ पुलिस राजनीतिज्ञों से जुड़े मामलों को सेंसेटिव बताकर उनका एफआईआर अपने पोर्टल में लॉक कर रही है। चाहे मामला कांग्रेस नेता से जुड़ी हो या भाजपा नेता से। उनका मामला सेंसेटिव होता है। हालांकि आप यह बिल्कुल मत सोचिएगा की इस परिभाषा की श्रेणी में और कोई वर्ग आता होगा। बाकी वर्ग के मामले कत्तई सेंसेटिव नहीं होते। पत्रकार वकील तो इस श्रेणी में दूर-दूर तक नहीं हैं और जहां तक आम जनता की बात है तो वो इस दायरे में कभी आती ही नहीं, जनता का मामला चाहे जितना सेंसेटिव (आपको लग सकता है) हो उसे सेंसेटिव नहीं कहते।
मामला बड़े लोगों का होता है शायद सेंसेटिव ही होता है
कुछ दिन पहले भाजपा के जिलाध्यक्ष पर छेड़छाड़ का आरोप लगा और थाने में शिकायत के बाद उस पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली लेकिन पुलिस के पोर्टल में उसे सेंसेटिव बताकर लॉक कर दिया गया। उसी तरह विधायक के बेटे द्वारा थाने में घुसकर मारपीट के एक मामले में भी पुलिस ने सेंसेटिव बताकर उसका एफआईआर अपने पोर्टल में लॉक कर दिया। हालांकि रायगढ़ पुलिस ने यह अभी तक क्लियर नहीं किया है कि इसमें मामला सेंसेटिव है या आरोपी या उनके दवाब में पुलिस सेंसेटिव हो गई है।
हालाँकि ऐसे कई मामले हैं जो सेंसेटिव हैं लेकिन वे किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं इसलिए वे सेंसेटिव नहीं कह जाते हैं। एक कांग्रेस पार्षद के आत्महत्या के मामले में पुलिस इतनी सेंसेटिव है कि एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मुंह पर चुप्पी का झालर लगा लिया है। उसमें जांच क्या हुई या होगी, इस मामले पर ज्यादा ही सेंसेटिव हो गयी है। ऐसे में तमाम तरह की अफवाह अब शहर में है लेकिन पुलिस सेंसेटिव है।
सिपाही की पिटाई का मामला भी इसी सेंसेटिव से इतना जुड गया है कि पुलिस के कोई भी अधिकारी खबर छापने वाले पत्रकारों को इसकी कोई भी जानकारी देने से कतरा रहे हैें। इतना ही नही हमेशा अपनी विज्ञप्तियों को वास्ट्अप में जारी करने में चर्चित पुलिस पीआरओ में भी मामले को पूरा छुपा दिया।
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https://samachardoot.in/2022/04/16/in-kotra-road-police-station-mla-prakash-nayaks-son-fiercely-rioted-assaulted-policemen-police-filed-fir-against-hrithik-nayak-even-earlier-hrithik-has-read-full-news/









