ऐसे कैसे करेंगे छात्र पढाई! सरकारी स्कूलों की पहली और सातवीं की किताबें खत्म;शिक्षा विभाग ने बताई यह वजह

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प्राइवेट स्कूलों के बाद अब सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी किताबों की कमी सताने लगी है। नैनीताल समेत कुछ अन्य जिलों में कक्षा 1 और कक्षा 7 की किताबें नहीं मिल रही हैं। मामले में अफसरों का कहना है कि ऐसा इस बार दाखिलों की संख्या में बढ़ोत्तरी के चलते हुआ है। फर्मों से किताबों की छपाई में तेजी लाने को कहा गया है।

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बीते साल तक शिक्षा विभाग की ओर से पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को पैसा दिया जाता था, ताकि किताबें बाजार से खरीद सकें। लेकिन इस शिक्षा सत्र से कक्षा 1 से 12वीं तक के बच्चों को किताबें खरीदकर दी जानी हैं। इसके एवज में स्कूलों को बजट उपलब्ध कराया जा चुका है।

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निदेशालय स्तर से किताबों की छपाई के लिए टेंडर कराए गए थे। इसके आधार पर हल्द्वानी की दो व मथुरा की एक फर्म को किताबें छापने का काम मिला है। शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक स्कूल से अपने संकुल को किताबों की डिमांड भेजी जानी है। इसके आधार पर फर्मों द्वारा उपलब्ध कराई जानी हैं।

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सरकारी स्कूलों के बच्चों को 1 अप्रैल से किताबें दी जानी थीं। कुछ कक्षाओं की किताबें तो बच्चों को मिल चुकी हैं, लेकिन कक्षा 7 की किताबें अब तक नहीं मिली हैं। मामले में शिक्षा विभाग के अफसरों का कहना है कि कक्षा 7 की किताबें मथुरा की फर्म से छपकर आनी हैं, लेकिन अब तक किताबें पहुंची ही नहीं हैं।

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इस बार कक्षा 9 से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं को पहली बार मुफ्त किताबें दिए जाने का निर्णय लिया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इन छात्र-छात्राओं की पाठ्य पुस्तकों पर जो खर्च आएगा, उसे प्रदेश सरकार वहन करेगी। जबकि कक्षा 1 से 8वीं तक के छात्र-छात्राओं की किताबों पर आने वाला खर्च केंद्र सरकार देगी।

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एक से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को समग्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्र सरकार की ओर से मुफ्त किताबें या इसके लिए पैसा दिया जाता रहा है। पिछले साल कक्षा 1 से 8वीं तक 6.50 लाख छात्र-छात्राओं को किताबों के लिए डीबीटी के माध्यम से पैसा दिया था।

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इस बार सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में बच्चे दाखिला ले रहे हैं। इससे किताबों की डिमांड पर भी फर्क पड़ा है। कक्षा 1 की करीब 2000 किताबों की जरूरत जिले को है। कक्षा 7 की किताबें भी मथुरा की फर्म से प्रकाशित होकर आनी हैं। सभी स्कूलों में पंजीकृत बच्चों को किताबें समय पर मिल जाएं।

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Author: samachardoot

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