रायगढ़। कहते हैं शिक्षा पर सभी का अधिकार है, अमीर हो या गरीब सभी को अच्छी तामिल देने शिक्षा पर कई स्लोगन लिखे गए हैं उनमें से ही एक है आओ एक समझदारी भरा कदम उठाएं, सबको शिक्षा का पाठ पढ़ाएं, एक गरीब परिवार अपने हालातों से थक हारकर पूरे परिवार समेत सड़क किनारे अपने बिटिया को अच्छी शिक्षा की मांग को लेकर तख्ती लेकर बैठा था। यूं तो इस मार्ग से कई अधिकारी से लेकर कर्मचारी गुजरे मगर सभी ने इनको देखकर अनदेखा किया। इसी दरम्यान इस मार्ग से गुजर रहे सिटी कोतवाली थाना प्रभारी मनीष नागर की नजर यहां पड़ी और फिर उन्होंने एक बार फिर से मानवता का परिचय देते हुए नन्हीं बच्ची का उसके मनपसंद स्कूल में दाखिल कराया। अब नन्हीं बच्चे के सपने को पंख मिल जाने से पूरे परिवार में खुशी की लहर है।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार चक्रधर नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अतरमुड़ा निवासी यादव परिवार की बेटी आरटीआई के तहत ज्ञान ज्योति नामक स्कूल में पढ़ाई कर रही थी। किसी कारणवश यह स्कूल बंद होनें से बच्ची की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई।
बच्ची के माता-पिता अपनी बेटी को किसी अच्छी स्कूल में दाखिला कराना चाहते थे। परंतु वो सक्षंम नही थे। इसके बावजूद पहले स्कूल से अनापत्ति भी प्राप्त कर ली, परंतु जहां बच्ची का दाखिला कराना था संबंधित स्कूल प्रबंधन ने बगैर जिला शिक्षा अधिकारी लिखित अनुमति के बच्ची का एडमिशन लेने से साफ इंकार कर दिया था। गरीबी से लाचार और बेबस परिवार एक बार नही कई बार जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय पहुंचकर उनसे गुहार लगाई गई, परंतु हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने कर्तव्यों का आसानी से निर्वहन करते हुए बच्ची को सरकारी स्कूल में दाखिला कराने का फरमान देकर हाथ तक जोड़ लिये।
यादव परिवार के सामने अब अपनी होनहार बेटी को अच्छी शिक्षा दिलाने तख्ती लेकर सड़क में उतरने के अलावा दूसरा कोई विकल्प बचा ही नही था। आज सुबह 11 बजे से यादव परिवार हाथों में तख्ती लेकर कलेक्टेªड में सामने धरने में बैठ गया। इसी बीच किसी काम के सिलसिले में नगर कोतवाल मनीष नागर इस मार्ग से गुजर रहे थे उन्होंने इस परिवार को देखकर रूक कर उनकी समस्या सुने और फिर इसका निराकरण करते हुए बेटी को सड़क में लेकर बैठना अच्छी बात मेरे साथ चलो बिटिया को उसके मनपसंद स्कूल में दाखिल कराउंगा कहकर सभी को अपने साथ ले गए।
सिटी कोतवाली थाना प्रभारी मनीष नागर बच्ची को गुरू द्रोण स्कूल लेकर पहंुचे और वहां स्कूल प्रबंधन से चर्चा उपरांत एक साल की फीस जमा करते हुए बच्ची का स्कूल में दाखिल कराया। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने भी सराहनीय पहल करते हुए बच्ची के यूनिफार्म और अन्य जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता भी की। साथ ही साथ बच्ची के 12वीं तक पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी उठाते हुए आधी फीस माफ करने की बात कही गई।










