Tiger 136 in Kuno: चीतों के इलाके में पहुंचा रणथंभौर का बाघ

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Tiger 136 in Kuno: ग्वालियर. अभी तक अफ्रीका से आए चीते ओबान व सासा के कूनो से बाहर निकलने की वजह से उन पर खतरा मंडरा रहा था। लेकिन अब नया खतरा सामने आया है। यह खतरा रणथंबोर अभ्यारण्य से निकला टाइगर टी 136 है। यह टाइगर प्रदेश में प्रवेश कर कर गया है और यह धौलपुर के जंगल में पहुंचा और इसके बाद चंबल पार कर श्योपुर के कूनो पहुंच गया है। कूनो के अफसरों ने रणथंबोर के अफसरों से मदद मांगी है जिससे टाइगर टी-136 को वापस किया जा सके। रणथंभौर प्रबंधन के अधिकारियाें के अनुसार अभी तक टाइगर टी-136 कूनाे में ही बसेरा किए हुए है और अगर उसे वहां का जंगल रास आ गया ताे टैरेटरी बनाकर चीताें के साथ रह सकता है।

इस तरह टी-136 पहुंचा कूनो

रणथंबोर से टाइगर टी 136 बाघ 220 किमी की दूरी तय करके पहले धौलपुर पहुंचा। इसके बाद 160 किमी की दूरी तय कर कूनो के जंगल में पहुंच गया है और अभी वहीं पर बसेरा डाले हुए थे।

कैसे है टाइगर चीतों के लिए खतरे की घंटी

फील्ड बायाेलॉजिस्ट रणथंभौर माेहम्मद मेराज ने बताया कि चीता आकार व साइज में छाेटा हाेता है। मांस खाने वाले जानवर प्रतिस्पर्धी होते हैं। वाे अपने क्षेत्र में मांसाहारी दूसरे जीव काे बदार्शत नहीं करते और देखते ही एक दूसरे काे जान से मारने का प्रयास करते हैं। चीता छाेटा है, इसलिए टाइर का मुकाबला नहीं कर सकता है। टाइगर और चीता की लड़ाई में टाइगर चीता काे मार देते है। चीता पांच बिल्लियाें की प्रजाति में सबसे कमजाेर हाेता है। ये पेड़ पर नहीं चढ़ सकता है। कूनाे में टाइगर की मौजूदगी चीताें के लिए खतरा है।

पहले भी आ चुके हैं रणथंबोर का टाइगर

बता दें कि टाइगर टी-80 तूफान का विचरण कैलादेवी करौली सेंचुरी में है। इसका संभवत टी 132 से संघर्ष हुआ है। जिसके कारण ये टिक नहीं पाया है। वहीं टी-136 इसलिए कूनाे पहुंचा कि उसे धौलपुर में टी-116 ने टिकने नहीं दिया। क्याेंकि टी 116 पहले से ही परिवार के साथ सेटल्ड है। इस कारण भटकते भागते व उल्टी दिशा पकड़कर कूनाे पहुंच गया।

कूनाे में टी 136, सीसीएफ रणथंभौर

धौलपुर के बाद एमपी सीमा में प्रवेश कर टाइगर टी 136 कूनाे चला गया है। वहां के अधिकारियाें ने इसकी जानकारी दी है। वहीं टी 132 आरटीआर प्रथम पहुंच गया है। – सेढूराम यादव, सीसीएफ रणथंभौर  
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Author: samachardoot

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