रायगढ़। महाराजा श्री अग्रसेन जयंती महोत्सव के अंतर्गत बुधवार को जूटमिल जोन के अग्रबंधुओं ने सामाजिक एकजुटता, श्रद्धा और समर्पण की अनूठी मिसाल पेश की। जूटमिल जोन के सदस्यों ने एक साथ शहर के चार प्रमुख स्थानों अग्रोहा भवन, अग्रसेन चौक, गांधी गंज और अग्रोहा धाम में महाराजा श्री अग्रसेन जी की आरती की। इस विशेष आयोजन में महिला, पुरुष और बच्चों सहित 300 से अधिक समाजजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
जूटमिल जोन के अग्रबंधुओं की इस पहल ने जयंती महोत्सव को नई ऊर्जा प्रदान की। चार अलग-अलग स्थानों पर एक साथ आरती का आयोजन समाज की सामूहिक आस्था और संगठन की शक्ति का प्रतीक बना। आरती के दौरान श्रद्धालुओं ने महाराजा श्री अग्रसेन जी का स्मरण करते हुए समाज की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उन्नति की कामना की। बड़ी संख्या में समाजजनों की उपस्थिति से चारों स्थानों पर उत्सव जैसा माहौल रहा।
*चार स्थानों पर एक साथ आरती बनी आकर्षण का केंद्र*
इस आयोजन की खास बात यह रही कि जूटमिल जोन के सदस्यों ने केवल एक स्थान तक सीमित न रहकर चार प्रमुख स्थलों पर एक साथ आरती की व्यवस्था की। इस सामूहिक प्रयास ने समाज के लोगों को एक सूत्र में बांधने का संदेश दिया। परिवार सहित पहुंचे अग्रबंधुओं ने पूरे श्रद्धाभाव से आरती में हिस्सा लिया। बच्चों से लेकर वरिष्ठ सदस्यों तक सभी की सहभागिता ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
*जूटमिल जोन के सदस्यों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका*
इस अवसर पर जूटमिल जोन से दीपक अग्रवाल, रोमा अग्रवाल, रेखा प्रतीक अग्रवाल, प्रतीक अग्रवाल, प्रवीण, रितेश, अरुण, विजय, हेमंत, मनोज, रितेश गोयल, मुकेश, विशाल, विकास, मुकेश बेरीवाल, के.के. बंसल, सुशील बंसल, अनिल जैन, राजा जैन, अशोक जैन, आलोक बंसल, आलोक अग्रवाल, सौरभ, तुषार, तन्मय, संजय, संजय अग्रवाल, किशन बेरीवाल, शशांक, सुमित, शालू गोयल, सचिन बंसल, जितेंद्र गोयल, नानकचंद अग्रवाल, कमला देवी, मीना अग्रवाल, मंजू अग्रवाल, अंजू अग्रवाल, कविता बंसल, ज्योति गोयल, विनीता, ममता गोयल, ममता बंसल, विधि, रिंकी, मीनू, रुचि, आशीष, अमित, दीप्ति, राखी, महावीर बंसल, सुनीता, अनीता नरेडी, राजेश चैंबर, गौरीशंकर नरेडी, जयप्रकाश जी और नरेश अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
*एकता और परंपरा का दिया संदेश*
महाराजा श्री अग्रसेन जयंती महोत्सव के दौरान जूटमिल जोन द्वारा आयोजित यह सामूहिक आरती सामाजिक सहभागिता और आपसी भाईचारे का प्रेरक उदाहरण बनी। आयोजन में समाज के लोगों की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि सामूहिक प्रयासों से धार्मिक परंपराओं को और अधिक भव्य एवं प्रभावशाली बनाया जा सकता है।









