कान्हा टाइगर रिजर्व में नौवें बाघ शावक की मौत, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से मौत की आशंका

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मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व के मुक्की परिक्षेत्र स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में उपचाराधीन मादा बाघ शावक की रविवार को मौत हो गई। शावक को आठ अक्टूबर को वन विकास निगम के मोहगांव प्रोजेक्ट अंतर्गत अरौली गांव से रेस्क्यू किया गया था।

वह आबादी के बीच पहुंच गया था और एक महिला पर हमला कर उसे घायल कर दिया था। कमजोर शारीरिक अवस्था में मिलने के बाद वन विभाग ने वन्यजीव चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में उसका उपचार शुरू कराया था। उसमें केनाइन डिस्टेंपर वायरस के लक्षण होने की आशंका जताई गई है।

एनटीसीए की एसओपी के तहत कार्रवाई

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार रविवार को मृत शावक का पोस्टमार्टम किया गया। कान्हा टाइगर रिजर्व के वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी, उप संचालक पशुपालन मंडला और बैहर के पशु चिकित्सक ने संयुक्त रूप से शव परीक्षण किया।

इसके बाद निर्धारित प्रोटोकाल के तहत शवदाह किया गया। पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए आवश्यक अंगों और जैविक नमूनों को फोरेंसिक एवं पैथोलॉजिकल जांच के लिए जबलपुर स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है।

वन अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ पोस्टमार्टम

कार्रवाई के दौरान कान्हा टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक रवीन्द्र मणि त्रिपाठी, हालोन के सहायक संचालक, मुक्की के परिक्षेत्र अधिकारी, एनटीसीए प्रतिनिधि रंजीत सत्रुसल्य, तहसीलदार, स्थानीय जनप्रतिनिधि और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। विभाग के अनुसार पूरी कार्रवाई निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुरूप की गई।

घर के आंगन में सो रही महिला पर किया था हमला

खटिया रेंज के मोहगांव बीट अंतर्गत अरौली गांव में सात अक्टूबर की रात मादा बाघ ने घर के आंगन में खाट पर सो रही 50 वर्षीय रमली बाई मरावी पर हमला कर दिया था। बाघ ने महिला के सिर और चेहरे पर पंजे मारे और उन्हें खाट से नीचे खींचकर घसीटा।

महिला की चीख सुनकर उनका बेटा बाहर आया और शोर मचाया, जिसके बाद मादा बाघ उन्हें छोड़कर भाग गया। गंभीर रूप से घायल महिला को स्वजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बम्हनी-बंजर ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल मंडला और फिर बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर किया गया था।

घटना के अगले दिन आठ अक्टूबर को हाथियों की मदद से बाघ की तलाश की गई। इस दौरान कमजोर अवस्था में मिले शावक को रेस्क्यू कर मुक्की स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र पहुंचाया गया, जहां उसकी लगातार देखरेख की जा रही थी। उपचार के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

कान्हा में छह माह में बाघों की मौत…

21 अप्रैल : 11 माह के बाघ शावक की मौत।

23 अप्रैल: दूसरे शावक की मौत।

25 अप्रैल: तीसरे शावक की मौत।

29 अप्रैल: अमाही बाघिन और चौथे शावक की मौत।

19 मई: पांच वर्षीय बाघ की मौत।

23 जून: तीन वर्षीय बाघ की मौत।

18 अक्टूबर: अरौली गांव से रेस्क्यू किए गए उपचाराधीन मादा बाघ शावक की मौत।

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Author: samachardoot

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