Jabalpur News : दो साल पहले सड़कों के गड्ढे भरने में फूंक दिए थे तीन करोड़, हालात जस के तस

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जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर के गड्ढे भरने के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये फूंक दिए गए लेकिन सड़कों की हालात में खास सुधार नहीं आया। शहर की चुनिंदा कुछ सड़कों को यदि छोड़ दिया जाए जो ज्यादातर सड़कों की हालात बारिश में बद से बद्तर हो गई है। जबकि नगर निगम, पीडब्‍ल्‍यूडी ने दो वर्ष पहले 74 किलोमीटर लंबाई की सड़कों के गड्ढे भरने, पेचवर्क करने के नाम पर तीन करोड़ 33 लाख रुपये खर्च कर दिए थे। बावजूद इसके हालात आज भी जस के तस हैं। शहर में इस बार ज्यादा बारिश हुई नहीं फिर भी शहरी क्षेत्र की अधिकांश सड़कें उधड़ चुकी थीं। इसमें वह सड़कें भी शामिल है जिन्हें एक वर्ष भी नहीं हुए हैं।

 

गड्ढे भरने रस्म अदायगी कर छोड़ा : कोरोना की दुहाई देकर सड़कों की न तो मरम्मत कराई गई न गड्ढे भरे गए। धीरे-धीरे सड़कों के गड्ढे बड़े होते गए। शहर की दो-चार स्मार्ट सड़कों को छोड़ दिया जाए तो लगभग सभी क्षेत्रों की सड़कों की हालत खराब हो चुकी है। जिन्हें भरने नगर निगम दिलचस्पी नहीं ले रहा। नगर निगम ने गत दिनों गड्डों की सुध ली भी तो कुछ दिन मलबा, मिट्टी डलवाने की रस्म अदायगी के बाद छोड़ दिया। ये कहकर कि बारिश में मरम्मत संभव नहीं है। मलबा, मिट्टी भरने से बारिश में परेशानी होगी। जबकि इस वर्ष बारिश हुई ही नहीं। नगर निगम के अधिकारियों से लेकर संभागीय अधिकारी भी अपनी जिम्मेदारियों से बच रहे हैं। जबकि नगर निगम के संभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने वार्डों की सड़कें दुरूस्त कराएं।

गड्ढे भरने में इंजीनियरिंग दरकिनार : नगर निगम द्वारा तीन करोड़ रुपये खर्च कर नंवबर 2019 में शहर के भीतर और उपनगरीय क्षेत्रों की सड़कें के गड्ढे भरे गए थे। जिसमें गोलबाजार, रानीताल, सिविक सेंटर, यादव कॉलोनी, गढ़ा, मेडिकल, अधारताल, विजयनगर सहित दर्जनों सड़कें शामिल हैं। निर्माण सामग्री से गड्ढे भरने में भी निगम प्रशासन का अमला दिन रात जुटा हुआ था। इसके बाद डामर और जीरा गिट्टी मिलाकर गड्ढे भरे जाने लगे। इसमें फिर से उन्हीं सड़कों में पेंच वर्क शुरू किया गया है। जहां पहले भी गड्ढे भरे जा चुके थे। लेकिन गड्ढों को भरने में इंजीनियरिंग दरकिनार कर दी गई। जिसके कारण सड़कें सुधर नहीं पा रहीं।

ऐसे भरे जाते हैं गड्ढे :

 

– नगर निगम के श्रमिकों के भरोसे छोड़ दिए जाते हैं गडढे

 

– श्रमिक ठेलों में डामर, गिट्टी का मिश्रण लेकर गड्डों में डाल देते हैं

 

– कई जगह जगह उसे समतल तक नहीं करते

 

– वाहनों के गुजरते ही गिट्टी डामर को छोड़ अलग हो जाती है

 

ये तकनीक अपनानी चाहिए :

– सड़कों के गड्ढे भरने के पहले उसे अच्छी तरह से साफ किया जाता है।

 

– सड़कों के जितने हिस्से में गड्ढा है उसे काटकर मिलाया जाता है। सुखाया जाता है ताकि नमी न रहे :

 

– इसके गर्म डामर, गिट्टी या जीरा मिलाकर उसे चारों तरफ से मिलाकर समतल किया जाता है

 

– इसके बाद रोलर से उसे समतल कर मिलाया जाता है ताकि उखड़ने की गुंजाइश न रहे।

 

गड्ढों पर खर्च राशि का ऐसा है गणित :

– 53 किमी लंबाई की सड़कों का पेचवर्क करने की योजना बनाई गई थी

 

– 2 करोड़ 39 लाख का अनुमानित खर्च करने की योजना थी।

 

– 74 किमी लंबाई की सड़कों के गड्ढे भरे गए

 

– 3 करोड़ 33 लाख खर्च किए गए।

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Author: samachardoot

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