जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नर्मदा के तिलवाराघाट तट से पूर्व बसी बरगी हिल्स कालोनी के हाल-बेहाल हो गए हैं। आलम यह है कि इसके अधिकतर क्वार्टर बुरी तरह जर्जर हो गए हैं। इसके बावजूद न तो सुधार कार्य की दिशा में गंभीरता बरती जा रही है और न ही उन्हें तोड़कर नए सिरे से निर्माण की योजना ही सामने आई है। इस वजह से दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।
प्रत्येक मकान में शीत के कारण दीवारों की पपड़ी उधड़ रही है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। तीन दशक पहले यह कालोनी चमाचम नजर आती थी। तब इसे देखने शहर से लोग जाया करते थे। गार्डन भी गुलजार था। लेकिन अब महज उजाड़ नजर आता है। देखरेख का अभाव ही इसकी वजह है। साल-दर-साल जिस गंभीरता का परिचय दिया जाना था, वह नदारद रही। लिहाजा, अब यह कालोनी पूरी तरह मिटाकर नए सिरे से बनाने की हालत हो गई है। यदि कुछ साल और लापरवाही जारी रही तो जनधन हानि से इनकार नहीं किया जा सकता। मध्य प्रदेश लघु वेतन कर्मचारी संघ ने बरगी हिल्स के क्वार्टर जर्जर होने को लेकर चिंता जताई है। विभागीय अध्यक्ष वैद्यनाथन अय्यर ने बताया कि जल निकासी और सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
इस वजह से यहां निवास करने वाले नारकीय माहौल से त्रस्त हैं। अधिकारी-कर्मचारी व उनके परिवार संक्रामक बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। हर घर में कोई न कोई बीमार है। शिकायत के बावजूद कोई सुध नहीं ले रहा है।मुख्य यंत्री व कार्यपालन यंत्री रानी अवंती बाई सागर परियोजना संभाग क्रमांक दो को ज्ञापन सौंपा गया। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।यदि यही हाल रहा तो उग्र आंदोलन तय है। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।









