इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि, Hindi Divas Indore। अपनी भाषा की इज्जत करें और सीखिए क्योंकि वो आपके अस्तित्व का एक बड़ा हिस्सा है। यह बात समझना बहुत मुश्किल है लेकिन अंतराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में हिंदी पाठ्यक्रम की शुरुआत होना और वहां के लोगों का हिंदी सीखना इस भाषा की महत्ता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। वर्तमान में विदेशी कम्पनियां बहुत अच्छे से जानती हैं कि भारत का बाजार विशाल है और जब किसी देश में व्यापार करना हो तो वहां की भाषा आना बहुत जरूरी है। इसलिए वे अपनी कर्मचारियों को हिंदी सिखा रहे है और यह हमारे लिए गर्व की बात हैं। आज दुनिया हमारी भाषा की इज्जत कर रही है तो हमें भी अपनी भाषा की महत्ता को जानना चाहिए।
यह बात लेखिका ज्योति जैन ने क्रिएट स्टोरीज सोशल वेलफेयर सोसायटी द्वारा आयोजित चर्चा में कही। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में संस्था द्वारा सोमवार को ‘हमारी हिंदी” विषय पर चर्चा आयोजित की गई। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से हुई इस चर्चा में समाजसेवी माला ठाकुर और पद्मश्री जनक पलटा ने संबंधित विषय पर चर्चा की। माला सिंह ठाकुर ने कहा कि हिंदी सहज, सरल, मौलिक व भावना व्यक्त करने की बहुत ही सरल भाषा है। हमें इस पर गर्व करना चाहिए। भावाभिव्यक्ति के जो सबसे उचित भाषा है वह हिंदी है लेकिन आज की पीढ़ी से यह भाषा दूर होती जा रही है। आज हम अपने बच्चो को अंग्रेजी के पीछे भागने पर मजबूर कर रहे हैं। जब जापान के व्यक्ति जापानी, रूस के रूसी, फ्रांस के नागरिक फ्रांसीसी भाषा में बोलना पसंद करते हैं और गर्व का अनुभव करते है तो हम हिंदी से संकोच क्यों करते हैं। अपनी भाषा को स्वाभिमान के साथ अभिमान का रूप बनाएं। इसकी शुरुआत खुद से करें। अपने अहस्ताक्षर हिंदी में करें, लिखने-पढ़ने का सामान्य काम हिंदी में करें, जितना संभव हो कार्यालयीन कार्य हिंदी में करें, घर में बच्चों को हिंदी में बोलने की आजादी दें।
पद्मश्री डा. जनक पलटा ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है। हिंदी वास्तव में हमारी भाषा है जो इस समय इस युग की विश्वस्तरीय भाषा है। हिंदी वास्तव में भाषा है जो केवल एक संचार का माध्यम नहीं, एक बोलचाल की भाषा नही है बल्कि ये आत्मा की भाषा है।









