बिलासपुर।ACB Bilaspur News: शासकीय सेवा में रहते हुए बेमानी कमाई से आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी आएन हीराधर व आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त सीएल जायसवाल के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। दोनों अफसरों के खिलाफ पूर्व में एसीबी में शिकायत हुई थी। इसके आधार पर एसीबी ने जांच की। जांच में जमीन, मकान, महंगी गाड़िया, फार्म हाउस, बैंक एकाउंट के साथ करोड़ों की संपत्ति जुटाने की जानकारी हासिल करने के बाद एसीबी ने कार्रवाई की है।
तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी हीराधर के खिलाफ वर्ष 2020 से पूर्व शिकायत की गई थी। तब से एसीबी की टीम ने उनके खिलाफ जांच कर रही थी। हीराधर बिलासपुर में दो बार जिला शिक्षा अधिकारी रहे। वहीं जांजगीर-चांपा सहित अन्य जिलों में भी पदस्थ रहे। आरोप है कि इसी दौरान उन्होंने विभागीय काम काज के साथ ही शिक्षकों की नियुक्ति, पदोन्न्ति, ट्रांसफर में लाखों स्र्पये की उगाही की थी।
शिकायत के आधार पर एसीबी ने जांच की। तब पता चला कि उन्होंने विजयापुरम कालोनी में मकान, मोपका में प्लाट, चांटीडीह में जमीन के साथ ही कांकेर जिले में कृषि भूमि सहित अपने व रिश्तेदारों के नाम से 12 से अधिक एफडी कराए हैं। शिकायत का परीक्षण करने के साथ ही एसीबी ने राजस्व विभाग के साथ ही बैंक, बीमा कंपनी सहित अन्य विभागों से जानकारी जुटाकर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के जरिए आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया है।
इसी तरह आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त सीएल जायसवाल के खिलाफ भी एसीबी से शिकायत की गई थी। जिस पर एसीबी की टीम जांच कर रही थी। जांच के दौरान उनकी संपत्ति का सत्यापन कराया गया और जानकारी हासिल की गई। तब पता चला कि कोरबा जिले के ग्राम गुरसिया में 23 प्लाट व मकान है। इसी तरह बिलासपुर में उनकी पत्नी के नाम पर आठ प्लाट है।
ग्राम नगोई में पांच एकड़ का फार्म हाउस के साथ ही सोनगंगा कालोनी में मकान, चांटीडीह और सिरगिट्टी में प्लाट है। उन्होंने अपने पिता के साथ ही पत्नी व अन्य रिश्तेदारों के नाम से संपत्ति बनाई है। आरोप है कि उन्होंने पद का दुरूपयोग करते हुए बेनामी कमाई से संपत्ति हासिल की है। आरोपित अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) डी, 13 (2) के साथ ही 120बी के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।









