बीजेपी के फायर ब्रांड नेता व स्व. दिलीप सिंह जूदेव के छोटे पुत्र युद्धवीर सिंह जूदेव का सोमवार तड़के 4 बजे निधन हो गया। युद्धवीर बीते कई महीनों से लीवर की समस्या से जूझ रहे थे और बैंगलुरू में उनका इलाज चल रहा था। पहले उन्हें दिल्ली फिर बैंगलुरू के अस्पताल में भर्ती किया गया था। यहां उनका लीवर ट्रांसप्लांट होना था पर उससे पहले ही स्थिति बिगड़ गई। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था, पर तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
युद्धवीर के निधन की खबर सुनते ही जशपुर में शोक की लहर दौड़ गई। सुबह करीब 8 बजे यह खबर वायरल हुई। यह वक्त सुबह बाजार खुलने का था। कुछ इलाकों की दुकानें खुल भी चुकी थीं, पर युद्धवीर के जाने के गम में व्यापारियों ने खुद ही अपनी दुकानें बंद कर दीं। कई दुकानदार दुकान तक आए और बगैर ताला खोले ही वापस चले गए। इधर विजय विहार पैलेस में युद्धवीर समर्थकों सहित शहर के लोगों ने आने का सिलसिला शुरू हो गया। हालांकि मौजूदा स्थिति विजय विहार पैलेस में युद्धवीर के परिवार से सिर्फ पैलेस की बड़ी बहू व उनका पुत्र शौर्य प्रताप था। इस घटना के बाद शहर शोक में ऐसा डूबा कि दिनभर बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। सब्जी मंडी में सब्जी की दुकानें तक नहीं लग पाईं। अति आवश्यक सेवाओं को छोड़कर लॉकडाउन की तरह ही सभी दुकानें, ढ़ेले, गुमटियां बंद रही।
आखिरी पड़ाव में संभाली बहुजन हिंदू परिषद की कमान
युद्धवीर सिंह बीमार होने के बाद भी अंतिम समय तक लोगों के लिए संघर्ष करते रहे। भ्रष्टाचार सहित कई मुद्दों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए आवाज उठाते रहे। जीवन के आखिरी पड़ाव में उन्होंने बहुजन हिंदू परिषद की कमान संभाली और हिंदुत्व के लिए बोलते रहे, वहीं भ्रष्टाचार और शासन-प्रशासन की अनियमितताओं को लेकर, राज्य की ज्वलन्त समस्याओं पर आवाज बुलंद की।
राजनीतिक विरासत अब प्रबल और संयोगिता के पास
अविभाजित मध्यप्रदेश के बड़े भाजपा नेता स्व. दिलीप सिंह जूदेव की राजनीतिक विरासत अब उनके दूसरे बेटे प्रबल प्रताप सिंह और छोटे बेटे स्व. युद्धवीर सिंह की पत्नी संयोगिता सिंह के पास चली गई है। जूदेव के तीन पुत्र थे। इनमें से सबसे बड़े पुत्र शत्रुंजय सिंह का निधन 12 में हार्ट फेल होने से हो गया। इसके बाद प्रबल प्रताप और युद्धवीर भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहे। युद्धवीर सिंह की पत्नी संयोगिता सिंह भी भाजपा में सक्रिय रहीं और उन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में चंद्रपुर विधानसभा सीट से टिकट भी मिला। वे चुनाव हार गईं, पर कार्य समिति की सदस्य के रूप में काम करती रहीं। प्रबल प्रताप भी जशपुर की पंचायत राजनीति में सक्रिय रहे और उपाध्यक्ष रहे। वे अभी भाजपा में संगठन मंत्री हैं। वे जशपुर में ही रहते हैं, जबकि संयोगिता जशपुर और रायपुर में सक्रिय हैं।








