पति-पत्नी के रिश्ते की मिसाल गुजरात की एक महिला ने पेश की है। पति पर साल 2002 में उगाही के आरोप लगने और फिर सजा होने से दुखी आशा गुप्ता ने कोर्ट में अपनी जंग जारी रखी और आखिरकार 19 साल बाद अपने पति को बेगुनाह साबित किया। वह भी तब, जब आशा के पति को गुजरे पांच साल बीत चुके हैं।
आशा की लड़ाई उस वक्त पूरी हुई जब मंगलवार को गुजरात हाई कोर्ट ने उनके पति ललित गुप्ता को साल 2002 के एक आपराधिक केस में निर्दोष घोषित किया। टीओआई की खबर के मुताबिक, ललित गुप्ता और उनके दोस्त रत्नाकर राहुरकर पर रावपुरा पुलिस ने उगाही के मामले में केस दर्ज किया था। साल 2008 में एक मजिस्टेरियल कोर्ट ने दोनों पर लगे गंभीर आरोपों को वापस लेते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी।
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इसके दो साल बाद सत्र न्यायालय ने दोनों की सजा को बरकरार रखा। दोनों दोस्तों ने हाई कोर्ट का रुख किया। मामला कोर्ट में लंबित था और इसी दौरान ललित गुप्ता का साल 2016 में कैंसर की वजह से निधन हो गया। इसके बाद उनकी विधवा आशा गुप्ता ने इस लड़ाई को जारी रखने का फैसला किया।
हालांकि, ललित गुप्ता की मौत के बाद उनकी याचिका पर सुनवाई रुक जाती लेकिन उनकी पत्नी ने सजा की वजह से लगे दाग को हटाने का फैसला किया। अब गुजरात हाई कोर्ट ने दोनों निचली अदालतों के फैसले को रद्द करते हुए गुप्ता और राहुरकर दोनों को निर्दोष घोषित कर दिया है।
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