यहां से कम दामों में होती है कई राज्यों में गांजा की तस्करी, जानिए कैसे होता है ये खेल…….पढ़िये पूरी खबर

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उपेन्द्र डनसेना समचारदूत।। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के पत्थलगांव में विजयादशमी के दिन गांजे से भरी कार के चालक के द्वारा लापरवाही पूर्वक गाड़ी चलाते हुए लोगों को कुचलने की ह्रदयविदारक बड़ी घटना के बाद भी ओडिशा से अवैध गांजे की तस्करी थमने का नाम नहीं ले रही है। गांजा तस्करों के लिए जशपुर जिला गांजा तस्करी के लिए सबसे सुरक्षित जिला बना हुआ। यही कारण है कि इसी जिले से होते हुए आये दिन गांजा तस्कर मध्यप्रदेश, बिहार, उतरप्रदेश और दिल्ली तक गांजा तस्करी करते है. हालांकि बीच-बीच में जशपुर पुलिस कार्रवाई के नाम पर छोटी-मोटी कार्रवाई करके सुर्खियां भी बंटोरती है लेकिन तस्कर गांजा तस्करी से बाज नहीं आ रहे है. और गांजा तस्करी का यह कारोबार निरंतर जारी है।

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यूं तो जशपुर जिला झारखण्ड और ओडिशा राज्य से लगा हुआ है. उड़ीसा राज्य के झारसुगड़ा, संबलपुर, अंगुल में चोरी छिपे तरीके से गांजे की खेती की जाती है और यही से कई राज्यों में गांजे की सप्लाई की जाती है. गांजा की अवैध तस्करी करने वाले तस्कर छत्तीसगढ़ से ओड़िसा को जोड़ने वाली सड़क जशपुर लावाकेरा और झारसुगड़ा सड़क के अलावा जंगलो के रास्तों का उपयोग करते हुए मध्यप्रदेश, उतरप्रदेश, बिहार और दिल्ली तक आसानी से गांजे की तस्करी करते है।

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पड़ोसी प्रांत ओडिशा में गांजे की कीमत काफी कम है, जबकि दूसरे राज्य में गांजे की कीमत ओड़िसा से कई गुना अधिक है। यही वजह है कि तस्कर इस गोरखधंधे में संलिप्त होते जा रहे हैं। एक जानकारी के मुताबिक ओड़िसा में पांच सौ से हजार रूपये किलो के भाव से गांजा मिलता है और वही गांजा छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में 10 हजार रूपये, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और बिहार में 20 से 25 हजार रूपये तक बिकता है। गांजा तस्करी करने वाले तस्कर लग्जरी कार के साथ साथ पिकप, ट्रक , बाइक का भी उपयोग करने के अलावा नदी नालों के जरिये भी नए नए तरकीब निकालकर गांजा तस्करी के लिए उपयोग कर चुके हैं, लेकिन कई बार पुलिस की सक्रियता की वजह से तस्करों के मंसूबो पर पानी फिर जाता है।

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पुलिस ,आरटीओ के अलावा आबकारी विभाग के द्वारा पड़ोसी प्रान्त ओडिशा बार्डर में तीन तीन चेक पोस्ट बनाकर ओडिशा की तरफ से आने वाले हरेक वाहनों की चेकिंग करने के बावजूद गांजा की खेप कई राज्यो में पहुंच रही है। परंतु इस दौरान तस्करों को कई थानों से गुजरना होता है, इसके बाद भी वे आसानी से अपने मंसूबो कैसे कामयाब हो जाते हैं ये जांच का विषय है।

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एक अकेले छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पिछले 11 साल में मदाक पदार्थ गांजा, अफीम, डोडा चुरा, सिरफ के प्रकरणों में गौर करें तो यहां 2011 में कुल गांजा के 16 प्रकरण बनाए गए जिनमें 24 आरोपियों को गिरफ्तार कर 242 किलो 36 ग्राम गांजा, 20 नग गांजा पौधा, अफीम पौधा 193 नग जब्त किया गया। इसी तरह 2012 में 17 प्रकरणों में 19 लोगों को गिरफ्तार कर 92 किलो 620 ग्राम गांजा व 05 नग पौधा, 2013 में 21 प्रकरणों में 28 आरोपियों से 02 क्विंटल 16 किलो 890 ग्राम, 5 नग पौधा, 2014 में 18 मामलों में 21 लोगों को गिरफ्तार कर 98 किलो 620 ग्राम एवं ठूठ 62 नग, 2015 में सर्वाधिक 33 प्रकरण बनाए गए जिनमें 46 लोगों को गिरफ्तार कर 356 किलो 690 ग्राम 1318 नग गांजा पौधा, 79 किलो 416 ग्राम डोडा चुरा, 04 किलो 792 ग्राम अफीम चूर्ण, कोरेक्स सिरप 600 नग एवं टोरेक्स सिरप 20 नग 100 शीशी, 2016 में 14 प्रकरणों में 25 आरोपियों से 05 क्विंटल 65 किलो 300 ग्राम, गांजा पौधा 02 नग , 05 किलो 500 ग्राम डोडा चुरा, 2017 में 6 प्रकरणों में 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर 94 किलो 850 ग्राम, 2018 में 12 प्रकरणों में 16 आरोपियों से 115 किलो 654 ग्राम, 333 नग गांजा पौधा, 2019 में 13 प्रकरण में 25 आरोपियों से 736 किलो 025 ग्राम, 08 नग गांजा पौधा, अफीम पौधा 4516 नग, कप सिरफ 320 नगर 100 एमएल शीशी, 2020 में 9 प्रकरण में 17 आरोपियों से 113 किलो 940 ग्राम, गांजा पौधा 06 नग, कप सिरप 3111 नग, 100 एमएल शीशी इसके अलावा वर्तमान साल 2021 में अभी तक 12 प्रकरण दर्ज किये जा चुके हैं जिनमें 17 आरोपियों से 598 किलो 79 ग्राम गांजा पकड़ा जा चुका है।

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Author: samachardoot

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