कोरोना की दूसरी लहर में बिहार से बाहर जान गंवाने वाले लोगों का अबतक भौतिक सत्यापन नहीं हुआ है। बिना भौतिक सत्यापन के मुआवजे की प्रक्रिया शुरू नहीं होगी। मुजफ्फरपुर के 62 मृतकों के मुआवजे भी इसमें अटके हैं। इनमें एक न्यायिक अधिकारी भी शामिल हैं, जो उस समय मुजफ्फरपुर में पदस्थापित थे। वह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले थे।
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आपदा विभाग का कहना है कि सरकार से इस बारे में अबतक कोई पत्र नहीं आया है। एडीएम आपदा अजय कुमार ने बताया कि सरकार से राज्य के बाहर कोरोना से मरे लोगों को मुआवजा या उनके भौतिक सत्यापन पर कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है।
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निर्देश आएगा, तब कार्रवाई की जाएगी। सिविल सर्जन डॉ. विनय कुमार शर्मा ने बताया कि मुआवजे पर स्पष्ट निर्देश है कि जिनका नाम सरकार के पोर्टल पर है, उनके आश्रित को मुआवजा दिया जाएगा।
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आपदा विभाग में 55 लोगों की कोरोना मुआवजा की राशि आयी है, लेकिन इसपर दावा करने वाला अबतक नहीं मिला है। आपदा एडीएम का कहना है कि इसके लिए लोगों को जानकारी भी दी है, लेकिन कोई अबतक सामने नहीं आया है।
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अगर एक हफ्ते में कोई परिजन नहीं आया तो राशि लौट जाएगी। कोरोना मुआवजे के तहत प्रत्येक मृतक के परिजन को चार-चार लाख रुपये दिए जाने हैं।
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दूसरी तरफ कोरोना मुआवजे के लिए आए 300 आवेदन छांट दिए गए हैं। एक ही मृतक पर दो आवेदन करने के कारण ये आवेदन छांटे गए हैं। 100 आवेदन पटना और 200 जिला स्तर पर छांटे गए हैं। सूत्रों ने बताया कि पुत्र और मां दोनों ने एक ही मृतक पर राशि का आवेदन दिया था। कई जगह दो भाइयों ने आवेदन कर दिया है। इसलिए आवेदन छांटे गए हैं।
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मुजफ्फरपुर में कोरोना के 700 आवेदन लंबित हैं। सीएस डॉ. विनय कुमार शर्मा का कहना है कि जितने लोगों की सूची भेजी गई थी, उसमें कई लोगों को मुआवजा मिल चुका है। सरकार को जिले से जून तक कोरोना मृतकों के परिजनों के आवेदन गए थे।
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657 लोगों के आवेदन भेजे गए थे। जून के बाद करीब 80 आवेदन और आए। कई आवेदनों में आईडी नहीं है तो कुछ पोर्टल पर नहीं चढ़े हैं। पोर्टल पर नहीं चढ़ने वाले मामले एसकेएमसीएच से लेकर निजी अस्पतालों के सामने आए हैं।









