सरकार गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने का दावा करती है, लेकिन जमीनी सच्चाई जस्ट उलट है। छत्तीसगढ़ के लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं। गरियाबंद जिले के एक गांव की विशेष पिछड़ी जनजाति कमार के सैकड़ों लोग गांव छोड़कर आंध्रप्रदेश, हैदराबाद के ईंट भट्ठों में काम करने चले गए और शासन को खबर तक नहीं लगी। घरों के दरवाजे पर ताला लटका है तो कहीं ईंट से घर को बंद कर भी किया गया है।
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ताला मामला गरियाबंद जिले के मैनपुर तहसील मुख्यालय से 40 किमी दूर ग्राम पंचायत इंदागांव और उसके आश्रित ग्राम अमली का है। इंदागांव पहाड़ी पर बसा गांव है। जंगलों से घिरे इस गांव के कमार जनजाति के लोग अभाव और परेशानियों के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं। उनकी जरूरत बेहद सीमित है।
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ग्रामीण दैनिक जरूरतों को पूरा करने मैनपुर मुख्यालय के बाजार तक बमुश्किल पहुंचते हैं। ऐसे में यदि पेट की आग बुझाने जंगल को छोड़कर आंध्रप्रदेश सहित दूसरे राज्यों में जा रहे हैं तो यह छत्तीसगढ़ शासन और सरकार के दावों पर सवाल उठाने के लिए काफी है राज्य सरकार द्वारा ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने ग्राम पंचायत के सचिव से लेकर आला अफसरों तक जिम्मेदारी सौंपी गई है, लेकिन अफसर इसे गंभीरता से नहीं लेते।
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छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था मजबूत करने का दावा कर रहे हैं और इधर रायपुर संभाग के गरियाबंद जिले के ग्राम अमली से लगभग 120 ग्रामीण पलायन कर कर गए।
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यह सभी विशेष पिछड़ी जनजाति कमार आदिवासी बताए जा रहे हैं। रोजगार की तलाश में आदिवासी आंध्र प्रदेश, हैदराबाद के ईंट भट्ठों में गए हैं। इन ग्रामीणों ने घरों दरवाजे को ईंट से बंद कर दिया है तो किसी कई घरों में ताले लटके हैं।
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ग्राम पंचायत इंदागांव के सरपंच रजमन नेताम ने बताया कि 150 कमार जनजाति के लोग पलायन गांव से पलायन किए हैं। उन्होंने बताया कि ग्राम अमली से आधे लोग पलायन कर गए हैं। 20-25 घरों में ताला लगा है। इसकी जानकारी उन्होंने एक माह पहले ही पंचायत सचिव मनोज साहू के माध्यम से जनपद पंचायत में देने को कहा था। सरपंच के अनुसार 150 विशेष पिछड़ी जनजाति आदिवासी कमार लोग आंध्रप्रदेश चले गए हैं।
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सरपंच ने बताया कमार विकास परियोजना के तहत कोई भी विकास कार्य और योजना का लाभ अमली के लोगों नहीं मिल रहा है। वहीं सचिव मनोज साहू का कहना है कि ग्राम अमली से हर साल लोग पलायन कर जाते हैं। यह उनकी आदत है, जबकि इस गांव में कई मनरेगा योजना के तहत कार्य चल रहे हैं। उनके मुताबिक 60-70 लोग पलायन कर गए हैं। उन्होंने बताया कि ग्राम अमली की जनसंख्या 260 के आसपास है।
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बताया जाता है कि दो साल पहले भी मैनपुर क्षेत्र के ग्राम अमली सहित आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में ग्रामीणों का पलायन आंध्रप्रदेश, ओडिशा व महाराष्ट्र हुआ था। तब वहां ईंट भट्ठों में बंधक बनाकर मजदूरों को रखने की शिकायत मिली थी।
गरियाबंद जिला के तत्कालीन कलेक्टर श्याम धावड़े के प्रयास से आंध्रप्रदेश, हैदराबाद, ओडिशा के ईंट भट्ठों से मजदूरों को छुड़ाया गया था।
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इधर जनपद पंचायत मैनपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रूपकुमार ध्रुव ने बताया कि ग्राम पंचायत के सचिव मनोज साहू के माध्यम से पता चला है कि ग्राम अमली से 60- 70 लोग पलायन कर आंध्रप्रदेश ईंट भट्टे में काम करने गए हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायत इंदागांव एवं उसके आश्रित ग्राम अमली में कई कार्य चल रहे हैं। तालाब, भूमिसुधार का कार्य गांव में चल रहा है फिर भी दूसरे प्रदेश पलायन कर जाना गंभीर मामला है।









