रायगढ ।कार्निवाल सिनेमा घर मे आज शहर वाशियो ने भाजपा नेता ओपी चौधरी व जिला भाजपा उमेश अग्रवाल सहित जिलाभाजपा के पदाधिकारीयो के साथ बैठकर द कश्मीर फाइल्स फिल्म का लुत्फ उठाया l
इस फ़िल्म के सबन्ध में जानकारी देते हुए ओपी चौधरी ने बताया कि निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचार को इस फ़िल्म के जरिये दिखाने का साहसिक प्रयास किया गया है l इस फिल्म निर्माण के दौरान बहुत सी बाधाएं आई l फिल्म बनाने के दौरान निर्माता को धमकियां तक मिली l ओपी चौधरी ने बताया कि द काश्मीर फाइल्स फिल्म कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की कहानी है l
19 जनवरी 1990 के दिन 60 हजार से ज्यादा कश्मीरी पंडितों ने घाटी से पलायन किया था। जम्मू-कश्मीर पुलिस की 2008 में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक आतंकवाद से मजबूर होकर 24 हजार से ज्यादा कश्मीरी पंडितों के परिवार ने कश्मीर छोड़ दिया था। 1989 से 2004 के बीच घाटी में 209 कश्मीरी पंडित मारे गए थे। हालांकि कश्मीरी पंडितों के संगठनों के मुताबिक ऐसे लोगों की संख्या हजारों में थी l फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ में बलिदानी स्कवाड्रन लीडर रवि खन्ना पर फिल्माए गए दृश्य को दिखाने पर अदालत की ओर से लगाई रोक का पालन करवाते हुए जम्मू में फिल्म का शो रोक दिया गया।
अदालत के निर्देश का पालन करते हुए जम्मू में शनिवार को फिल्म नहीं दिखाई गई l कश्मीर के हालातों को सुधारने के लिए मोदी जी ने मजबूत राजनैतिक कदम उठाते हुए धारा 370 को खत्म कर कश्मीर से आजादी की माँग को हमेशा के लिए खत्म ही कर दिया l ओपी ने आम जनता से अपील करते हुए इस फिल्म के जरिये कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचार की हकीकत देखने का आग्रह किया है l
कश्मीर समस्या को खत्म करने के लिये मोदी जी ने मजबूत इच्छा शक्ति का परिचय दिया l आम जनता ने वोटों की ताकत ने मोदी जी को मजबूत किया और भाजपा ने देश हित मे निर्णय लिया l निर्माता विवेक ने अपनी पिछली फिल्म ‘द ताशकंद फाइल्स’ से दुनिया भर के लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा पिछली बार उन्होंने इतिहास की मैली चादर से ढकी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की हत्या की असलियत को दुनिया के सामने लाने की कोशिश की थी, इस बार उन्होंने कश्मीर की सबसे गंभीर समस्या का नकाब नोंचा है। सामने जो कुछ आता है वह भीतर तक हिला देने वाला है। लोग कह सकते हैं कि फिल्म में तकनीकी कमाल नहीं है, लेकिन इस फिल्म का कमाल इसका सच है। वह सच जिसे कह सकने की हिम्मत कश्मीर से निकले तमाम निर्देशक तक नहीं दिखा पाए।
“फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ एक तरह से इतिहास की उन ‘फाइल्स’ को पलटने की कोशिश है जिनमें भारत देश में वीभत्स नरसंहारों के चलते हुए सबसे बड़े पलायन की कहानी है। देश में कश्मीर पंडित ही शायद इकलौती ऐसी कौम है जिसे उनके घर से आजादी के बाद बेदखल कर दिया गया है और करोड़ों की आबादी वाले इस देश के किसी भी हिस्से में कोई हलचल तक न हुई। जिस कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक होने वाले देश का दम बार बार बड़े बड़े नेता भरते रहे हैं, उसके हालात की ये बानगी किसी भी इंसान को सिहरा सकती है। कोई 32 साल पहले शुरू होती फिल्म की इस कहानी की शुरुआत ही एक ऐसे लम्हे से होती है जो क्रिकेट के बहाने एक बड़ी बात बोलती है। घाटी में जो कुछ हुआ वह दर्दनाक रहा है। उसे पर्दे पर देखना और दर्दनाक है। आतंक का ये एक ऐसा चेहरा है जिसे पूरी दुनिया को दिखाना बहुत जरूरी है। कहानी कहने में इसके एक डॉक्यूमेंट्री बन जाने का भी खतरा था, लेकिन सच्चाई लाने के लिए खतरों से किसी को तो खेलना ही होगा।”
“सिनेमा के लिहाज से ये फिल्म ‘शिंडलर्स लिस्ट’ तक पहुंचने की कोशिश करती है। यहां का नरसंहार भले उस पैमाने सा ना हो लेकिन इसका भयानक और वीभत्स एहसास उससे कुछ कम भी नहीं है। फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ पूरी तरह से विवेक अग्निहोत्री की फिल्म है। फिल्म की रिसर्च इतनी तगड़ी है कि एक बार फिल्म शुरू होती है तो दर्शक फिर इससे आखिर तक बाहर निकल नहीं पाते। वे एंड क्रेडिट्स के वक्त एकदम गुमसुम और खामोश से बस खड़े के खड़े रह जाते हैं और पता ही नही चलता कि समय कब खत्म हो गया l
फिल्म के दौरान मौजूद रहे
उद्योग पतियों में श्री राम हाईटेक से बजरंग अग्रवाल ,इण्ड एग्रो से श्रवण अग्रवाल ,अनूप बंसल ,रायगढ़ इस्पात डायरेक्टर कमल अग्रवाल, ध्रुव अग्रवाल, वकीलों में सत्येंद्र सिंह, सुनील शर्मा ,बाबूलाल अग्रवाल ,अभिजीत मल्लिक ,प्रदीप राठौर, वंदना केशरवानी, अर्सलीन मन्नत,
मीडिया से अनिल रतेरिया, नरेश शर्मा, विजय केड़िया, दिनेश मिश्रा, प्रवीण त्रिपाठी हर्ष चैनल के डायरेक्टर सुशील मित्तल, नन्दू पटेल ,अविनाश पाठक,
नवीन शर्मा, गणेश अग्रवाल,अमित पांडेय, प्रेमनारायण मौर्य, मनीष अग्रवाल, संजय बोहिदार ,संतोष पुरुषवानी, अनिल आहूजा, विवेक श्रीवास्तव ,अभिषेक उपाध्याय, पुनिराम रजक, भाजपा परिवार के सदस्यों में जगन्नाथ पाणिग्राही, जवाहर नायक, राजेश शर्मा, विवेक रंजन सिन्हा, अरुणधर दीवान ,सतीश बेहरा ज्योति पटेल ,आशिष ताम्रकार, सुभाष पांडेय, सुरेश गोयल , नरेश पटेल, अफरोज डायमंड,मुकेश जैन, अजय जवाहर नायक, ज्ञानेश्वर सिंह गौतम ,आलोक सिंह,
मनीष शर्मा, गौतम अग्रवाल ,कल्पेश पटेल,अंशु टुटेजा,गौतम चौधरी, दीपेश सोलंकी,मनोज प्रधान,अरुण कातोरे,शशिकांत शर्मा,विनायक पटनायक, सूरज शर्मा , अंकुर गोरख ,सुमीत शर्मा , मुक्तिनाथ बबुआ, शक्ति अग्रवाल, अनुपम पाल, रविन्द्र भाटिया, मनोरंजन साव, ,रज्जू संजय, शिव काशी, मितेश शर्मा, सानु जाटवर, दिलराज दिलीप सिंह,श्री अंश ठाकरे, सोमेश साहू, राघवन सिंह, कमल पटेल , दुर्गेश डनसेना , धनुरजय चौधरी , ओमकार पटेल गगन कातोरे , सोमेश साहू, रामजाने भारद्वाज , ओमकार तिवारी, विकास केशरवानी, जनेश्वर मिश्रा, मनोज राठौर, साहिल मनियार, अनिल कटियार, राजेंद्र दीवान, कैलाश पंडा, डिग्रीलाल साहू, राजेन्द्र ठाकुर, परदेशी मिरी ,मनोज शर्मा, पार्षदों में महेश कंकरवाल, शीनु राव पदुमलाल परजा, खुलू सारथी ,
महिला भाजपा नेत्रियो में, शिला तिवारी ,दुर्गा देवांगन ,त्रिवेणी डहरे,नेहा देवांगन, पिंकी पंडा, बीना चौहथा, लक्ष्मी वैष्णव,शोभा शर्मा, रीता निषाद, सावित्री मिश्रा,अविनाश बेरीवाल आलोक अग्रवाल, बालकृष्ण केड़िया शामिल रहे
झलकिया
■ ओपी चौधरी के न्यौते पर शहर वासियो ने देखी द काश्मीर फाइल
■ओपी चौधरी व उमेश अग्रवाल ने सभी मेहमानो को तिरंगे का बैच लगाकर स्वागत किया
■फ़िल्म में जैसे ही भारत तेरे टुकड़े होंगे और हमे चाहिए आजादी के नारे लगते तब दर्शक दीर्घा में बैठे दर्शक भारत माता की जय के नारे लगाते
■ ओपी के आग्रह पर इस फ़िल्म को देखने उद्योग पति डॉक्टर्स वकील मीडिया सामाजिक संस्था सहित गणमान्य जन आये और मिलकर फ़िल्म का आनद लिया
■फिल्म खत्म होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने जयश्री राम के साथ नारा लगाया कि जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है l









