दंतेवाड़ा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। एक नाबालिग पिता ने अपने ही डेढ़ माह के मासूम बच्चे को मौत के घाट उतार दिया है। रात में अपनी नाबालिग पत्नी के पास सोए मासूम को पहले उठाकर ले गया। गांव में एक पुल के नीचे मासूम को छिपा दिया। सुबह फिर जाकर देखा तो बच्चा जिंदा था। उसने जिंदा बच्चे को तालाब में फेंक दिया।
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नाबालिग ने घटना को अंजाम देने और पुलिस से बचने यूट्यूब में कई बार वीडियो भी देखा। घटना को सुलझाने में पुलिस को सप्ताहभर का समय लगा।
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शुक्रवार को दंतेवाड़ा एसपी सिद्धार्थ तिवारी ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि अपचारी बालक ने अपने परिवार वालों के साथ 25 मई को बारसूर थाने में अपने डेढ़ माह के बच्चे का अपहरण करने की आशंका जताई थी।
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पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। शिकायतकर्ता के बयान में पुलिस को विरोधाभाष नजर आया। कड़ाई से पूछताछ करने पर वह टूट गया और अपना अपराध स्वीकार कर पूरी सच बताया।
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अपचारी बालक ने बताया कि उसकी शादी के 7 माह बाद ही वह पिता बन गया। ऐसे में उसे समय से पहले पिता बनने पर मन में शंका था। उसने बच्चे की हत्या करने का प्लान बनाया। हत्या करने के बाद इसे घटना का स्वरूप देने अपने स्मार्ट फोन में यूट्यूब पर कई वीडियो देखा। हत्या करने और साक्ष्य छिपाने की तरकीब देखी।
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जब अपचारी को लगा कि अब वह पूरी सफाई से इस घटना को अंजाम दे सकता है तो उसने 21 मई की देर रात अपने बच्चे का अपहरण कर उसे पूल के नीचे छुपा दिया। अगली सुबह दुबारा पूल के नीचे से बच्चे को निकाल कर जंगल में बने तालाब में ले जाकर फेंक दिया।
अपचारी ने इसे घटना का स्वरूप देने की नियत से बच्चे के कमर में बंधे धागे को घर के बगल में फेंक दिया। बच्चे को ओढ़ाने के लिए रखे कपड़े में चूजे का खून डालकर उसे कुछ दूरी पर फेंक दिया ताकि यह घटना जंगली जानवर द्वारा अंजाम देना जैसा लग सके। पुलिस ने बताया कि इस हत्याकांड में अपचारी ने जिस तरह से पुलिस को भ्रमित करने की योजना बनाई थी, उससे पुलिस को भी काफी पसीना बहाना पड़ा है। दंतेवाड़ा एसपी सिद्धार्थ तिवारी के अनुसार आरोपी नाबालिक होने की वजह से उसे संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है। उस पर 302, 363, 201, 376 और पाक्सो का मामला दर्ज किया गया है।







