रायगढ़। अनुसूचित जनजाति की युवती से अश्लील हरकत, अनाचार का प्रयास और टार्चर करने के मामले में एट्रोसिटी की विशेष अदालत ने आरोपी को अलग-अलग धाराओं में तीन वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदण्ड से दंडित किया है।
अभियोजन कथा का सार संक्षेप में इस प्रकार है कि 12 जनवरी को पीडिता के घर के लोग मजदूरी करने गए थे तथा वह घर पर अकेली थी तभी प्रातः करीब 09 बजे उसके गांव का आरोपी घर अंदर घुसकर उससे बात करना है, कहा, पीडिता को आरोपी का स्वभाव अच्छा नही लगा तब वह आरोपी से बात करने से इंकार कर दी तब आरोपी उसकी बेइज्जती करने की नियत से दोनो हाथ को पीछे से दबाकर एक हाथ से उसका मुह को दबा दिया और उसके स्तन को दबाने लगा और जमीन में गिरा दिया तथा उसके पहने लैगिस को छेड़छाड़ी करने लगा।
आरोपी अपने साथ लाये बिजली के तार से जोड़कर उसे करंट देने की कोशिश किया तब वह आरोपी को धक्का देकर चिल्लाते हुए घर से बाहर निकली और अपनी बुआ के घर जाकर घटना के बारे में बताई, उसकी बुआ पीडिता के माता, पिता को बुलाकर लाई तब उन्हें पीडिता ने घटना के बारे में बताया, पीडिता द्वारा उक्त घटना के संबंध में पुलिस चैकी जूटमिल में लिखित शिकायत प्रस्तुत की, जिसके आधार पर आरोपी के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट अपराध क्रमांक 80ध्2022 दर्ज किया गया, पीडिता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।
घटना स्थल का नजरी नक्शा तैयार किया गया, घटना स्थल से एक बिजली का तार एवं एक चप्पल जप्त किया गया, साक्षियों के कथन दर्ज किये गये, आरोपी को गिरफ्तार किया गया तथा अन्वेषण पूर्ण कर आरोपी के विरुद्ध धारा 454, 354, 354 (क) भा०दं०सं० एवं धारा 3 (2) (5) (क) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) के अंतर्गत अभियोगपत्र इस न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अदालत में सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश एट्रोसिटि जितेंद्र कुमार जैन ने उपरोक्त प्रकरण में आरोपी को दोष सिद्ध करार देते हुए आरोपी योगेन्द्र महंत को धारा 452 भा०दं०सं० में 02 (दो) वर्ष के सश्रम कारावास एवं₹5,000 (पांच हजार रुपये) अर्थदण्ड से, धारा 354 भा०दं०सं० में 02 (दो) वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5,000 (पांच हजार रुपये) अर्थदण्ड से, धारा 354 (ख) भा०दं०सं० में 03 (तीन) वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹10,000ध्- (दस हजार रुपये) अर्थदण्ड से एवं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3 (1) (ू) (1) में 01 (एक) वर्ष के सश्रम कारावास एवं ₹5,000ध्- (पांच हजार रुपये) अर्थदण्ड से दण्डित किया जाता है, आरोपी द्वारा अर्थदण्ड की राशि अदा न करने पर उसे क्रमशः 15 दिन, 15 दिन, 01 माह एवं 15 दिन का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगताया जाये, आरोपी को दी गई कारावास की सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अनूप कुमार साहू ने पैरवी की।









