IAS कलेक्टर सहित तीन वरिष्ठ अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर से वन अधिकार पट्टा देकर ग्रामीणों से लाखों रुपयों की ठगी, जांच का आदेश, होगी कड़ी कार्रवाई

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला में IAS के फर्जी हस्ताक्षर से सैकड़ो ग्रामीणों से लाखों रूपये की ठगी किये जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया हैं। बताया जा रहा हैं कि तात्कालीन कलेक्टर किरण कौशल, डीएफओं, और सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग के फर्जी हस्ताक्षर से सैकड़ो ग्रामीणों को फर्जी वन अधिकार पट्टा बनाकर 30 से 50 हजार रूपयें में बेचा गया हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब कलेक्टर संजीव झा ने एसडीएम को जांच कर तत्काल FIR कराने का निर्देश दिया हैं।

 

गौरतलब हैं कि शासन द्वारा वनभूमि में सालों से काबिज ग्रामीणों को वन अधिकार का पट्टा वितरित किया जाता हैं। कोरबा में भी तात्कालीन कलेक्टर किरण कौशल के कार्यकाल में जिले में वन अधिकार पट्टा का वितरण किया गया था। लेकिन पट्टा वितरण के बाद पाली विकासखंड में एक कथित गिरोह के द्वारा एक बार फिर से ग्रामीणों से मोटी रकम लेकर फर्जी तरीके से वन अधिकार पट्टा बनाने का खुलासा हुआ है।

 

जिला वन अधिकार समिति के सदस्य व जिला पंचायत सदस्य गणराज सिंह ने पूर्व कलेक्टर किरण कौशल सहित पूर्व डीएफओ और सहायक आयुक्त के फर्जी हस्ताक्षर से वन अधिकार पट्टा बेचे जाने की जानकारी कलेक्टर को दी हैं। गणराज सिंह के अनुसार पिछले दिनों उन्हे ग्राम पंचायत मांगामार के पूर्व सरपंच छत्रपाल सिंग राज ने गांव में फर्जी पट्टा बनाये जाने की सूचना दी गयी थी। उन्होने तत्काल उक्त पट्टा का फोटो व्हाट्सएप पर मंगवाया।

 

जिला पंचायत संदस्य गणराज सिंह ने शिकायत में बताया है कि शासन के द्वारा जारी पट्टा से मिलता-जुलता हूबहू फर्जी पट्टा बनाकर गिरोह द्वारा ग्रामीणों को बेचा गया है। फर्जी पट्टा की जांच के लिए उन्होने उसके सीरियल नंबर की जांच करायी जिसमें पता चला कि उक्त सीरियल नंबर किसी दूसरे ग्रामीण के नाम पर जारी पट्टा का है, जिसे ठग गिरोह के सदस्यों ने फर्जी पट्टा में दर्ज कर ग्रामीण का नाम दर्ज कर एकड़ो में जमीन का वन अधिकार पट्टा बांट दिया हैं।

 

गणराज सिंह के अनुसार निजी जांच में इस बात की भी पुष्टि हुई हैं कि फर्जी पट्टा में कलेक्टर, डीएफओ और सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग के सील और हस्ताक्षर में भी काफी अंतर हैं। जो पट्टा सही है उसमें पूर्व सहायक आयुक्त डी. आर. बंजारे के सील पर उनका नाम भी अंकित था, जबकि फर्जी पट्टा में सिर्फ सहायक आयुक्त का सील लगाया गया है। इस खुलासे के बाद वन अधिकार समिति के सदस्य गणराज सिंह ने इसकी शिकायत कलेक्टर संजीव झा से की है जिस पर कटघोरा एसडीएम मनोज खांडे को जांच कर एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया गया हैं।

 

जानकारी के अनुसार इस फर्जीवाड़े में शामिल गिरोह के सदस्यों ने पाली क्षेत्र के 15 से 20 गांव में सैकड़ो ग्रामीणों का पट्टा तैयार किया गया हैं। पूछताछ में ये बात सामने आयी हैं कि प्रति एकड़ भूमि के मुताबिक 30 से 70 हजार रूपये तक ग्रामीणों से फर्जी पट्टा बनाने के नाम पर गिरोह के सदस्यों ने वसूले हैं, जो कि करोड़ो में हैं।

 

अपर कलेक्टर विजेन्द्र सिंह पाटले ने कहा है कि फर्जी वन अधिकार पट्टा का प्रकरण जिला प्रशासन के संज्ञान में आया है। इसकी जांच की जायेगी औरकड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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Author: samachardoot

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