सरकारी जमीन पर अवैध बोर खनन, पुलिस ने राजस्व विभाग का कार्य है कहकर झाड़ा पल्ला , उठे गंभीर सवाल

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धरमजयगढ़ :- जिले में गहराते जल संकट के बीच प्रशासन भले ही अवैध बोर खनन पर सख्ती के दावे कर रहा हो, लेकिन छाल क्षेत्र के नावपारा में जो तस्वीर सामने आई है उसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां थाना क्षेत्र से कुछ ही दूरी पर, मुख्य सड़क किनारे, सरकारी जमीन पर खुलेआम अवैध बोर खनन किया गया और जिम्मेदार विभाग तमाशबीन बने रहे।

 

जानकारी के मुताबिक, नावपारा स्थित SECL आवासीय परिसर के मुख्य गेट के सामने एक निजी व्यक्ति द्वारा कथित रूप से रसूख और पैसे के दम पर अवैध बोरिंग कराई गई। इसके लिए रायगढ़ से “लक्ष्मी बोरवेल” की भारी मशीन मंगाई गई। हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी ड्रिलिंग मशीन कई इलाकों से गुजरते हुए छाल पहुंची, लेकिन रास्ते में कहीं भी उसे रोकने या पूछताछ करने की कार्रवाई नहीं हुई।

 

कलेक्टर के आदेश की खुलेआम अवहेलना

 

जिले में भूजल स्तर लगातार गिरने के कारण जिला प्रशासन पहले ही बिना अनुमति बोर खनन पर प्रतिबंध लगा चुका है। जिला कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बिना वैध अनुमति किसी भी प्रकार की ड्रिलिंग पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद नावपारा में दिनदहाड़े सरकारी जमीन पर बोरिंग होना प्रशासनिक सख्ती की पोल खोलता नजर आ रहा है।

 

सरकारी जमीन पर खनन, फिर भी कार्रवाई नहीं

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर बोरिंग की गई वह शासकीय भूमि है। ऐसे में यह मामला सिर्फ अवैध बोर खनन तक सीमित नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण और नियमों की खुली अनदेखी का भी है। ग्रामीणों ने जब इसकी शिकायत संबंधित विभागों से की तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

 

पुलिस की भूमिका पर सवाल

 

सूत्रों के अनुसार, मामले की जानकारी छाल पुलिस को भी दी गई थी। आरोप है कि शुरुआती स्तर पर पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय “पहले बोर साफ होने दो” जैसी बात कहकर मामला टालने की कोशिश की। बाद में जब शिकायतकर्ताओं ने प्रमाण और तथ्यों के साथ दोबारा आपत्ति दर्ज कराई तो पुलिस ने इसे राजस्व विभाग का मामला बताते हुए पल्ला झाड़ लिया।

 

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब अवैध बोरिंग पर रोक का आदेश जिला दंडाधिकारी स्तर से जारी हुआ है, तो उसे लागू कराने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या स्थानीय पुलिस केवल मूकदर्शक बनी रहेगी? और यदि मामला शासकीय भूमि का है तो क्या तत्काल रोकथाम और एफआईआर की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी?

 

रसूखदारों को संरक्षण?

 

ग्रामीणों में चर्चा है कि बिना प्रभावशाली संरक्षण के इतनी बड़ी कार्रवाई संभव नहीं हो सकती। लोगों का कहना है कि यदि यही काम कोई आम व्यक्ति करता तो अब तक मशीन जब्त कर कार्रवाई हो चुकी होती। लेकिन यहां पूरा मामला विभागों के बीच जिम्मेदारी टालने की “फुटबॉल पॉलिटिक्स” में उलझता दिखाई दे रहा है।

 

जनता पूछ रही जवाब

 

एक ओर आम लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर कथित रसूखदार खुलेआम भूजल दोहन कर रहे हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित लोगों, बोरवेल संचालक और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा।

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Author: samachardoot

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