बिलासपुर। Bilaspur High Court News: रायपुर के आइटीआइ में पदस्थ संविदा कर्मचारी की मां को कैंसर है, उनके उपचार के लिए कोर्ट ने एडवांस राशि देने का आदेश दिया था। इसके बाद भी उन्हें राशि नहीं दी गई। इस मामले में दायर अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग के संचालक को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
ओमप्रकाश मानिकपुरी रायपुर स्थित आइटीआइ में संविदा कर्मचारी हैं। उनकी मां कैंसर पीड़ित है, जिनका इलाज के लिए उन्हें स्र्पयों की आवश्यकता है। इस पर उन्होंने संस्थान के प्राचार्य के समक्ष एडवांस राशि देने के लिए विधिवत आवेदन दिया। लेकिन, प्रबंधन ने उनके आवेदन को अस्वीकार कर दिया। साथ ही बताया कि संविदा कर्मचारी को एडवांस राशि देने का कोई प्रविधान नहीं है। इस पर उन्होंने रोजगार एवं प्रशिक्षण के उपसंचालक के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इससे परेशान होकर उन्होंने अधिवक्ता प्रांजल शुक्ल के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें बताया कि छत्तीसगढ़ सिविल सर्विसेस मेडिकल केयर नियम 2013 में प्रविधान है कि संविदा कर्मचारियों को भी उनके या उनके परिजनों की आवश्यक के लिए एडवांस राशि दी जाएगी। पूर्व में जस्टिस गौतम भादुड़ी ने मामले की सुनवाई करते हुए 28 दिन में राशि प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था। लेकिन, इसके बाद भी एडवांस राशि देने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर ओमप्रकाश ने उप संचालक मनीषा नाग को पक्षकार बनाकर न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है। मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने उप संचालक को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मागा है। इस बीच प्रकरण में रोजगार एवं प्रशिक्षण संचाल को भी पक्षकार बनाने को कहा गया है। इस पर उन्हें पक्षकार बनाते हुए संशोधित याचिका पेश की गई, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने रोजगार एवं प्रशिक्षण संचालक को अवमानना नोटिस जारी किया है।









