इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि Indore News । शहर में सोमवार रात को पकड़े गए सांची के अमानक दूध के टैंकर के बाद पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया है। पकड़े गए टैंकर के चालक और कंडक्टर ने बताया था कि वह रास्ते में टैंकर की सील से छेड़छाड़ कर दूध निकाल बेच देते थे और उसमें पानी मिला देते थे।
इंदौर दुग्ध संघ के 35 टैंकर पूरे संभाग के अलग-अलग केंद्राें से करीब 2.70 लाख लीटर दूध का कलेक्शन करके इंदौर के प्लांट पर लाते हैं। यह सभी टैंकर दुग्ध संघ के ही हैं, लेकिन ड्राइवर और सहायक, ठेका कंपनी रतन एम्पोरियम के हैं। दुग्ध संघ द्वारा हर टैंकर पर जीपीएस से निगरानी की जाती है।
इसके बाद भी टैंकर से सेंधवा के रास्ते में छेड़छाड़ कर और सील अलग करके दूध निकाल लिया गया, यह ताज्जुब की बात है। वर्ष 2017 में भी दुग्ध संघ में एक ठेकेदार के टैंकर में दूध में मिलावट का ऐसा ही मामला सामने आया था। इसके बाद से दुग्ध संघ ने प्राइवेट टैंकर हटाकर सारे अपने टैंकर खरीदे थे। साथ ही टैंकरों की निगरानी के लिए अपने तंत्र को और मजबूत किया। पर ड्राइवरों के मामले में दुग्ध संघ अब भी सर्विस प्रोवाइडर ठेका कंपनी पर ही निर्भर है, क्योंकि पूरे प्रदेश के दुग्ध संघों के पास मैनपावर की कमी है।
दुग्ध संघ के सीईओ एएन द्विवेदी का कहना है कि हमारे प्लांट पर लगे सर्वर के जरिए जीपीएस से हर टैंकर की 24 घंटे निगरानी रहती है। यदि कोई टैंकर रास्ते में थोड़ी देर के लिए भी रुकता है तो यह हमें दिख जाता है और हमारे कर्मचारी उसे तुरंत फोन करके पूछते हैं कि क्यों रुक गए। यदि कोई तय रूट से जरा भी इधर-उधर होता है तो वह भी जीपीएस की निगरानी में आता है। इसके बाद भी सेंधवा से आने वाले टैंकर की सील खुलने की जानकारी मिल रही है। हमने पूरे मामले की जांच के लिए लसुड़िया पुलिस को पत्र लिखा है। हम भी अपनी व्यवस्था की जांच-पड़ताल कर रहे हैं। जहां भी खामी मिलेगी, उसे दूर किया जाएगा।









