अंतरिक्ष और साइंस की दुनिया अपने आप में एक अजूबा है। कई बार अंतरिक्ष में घूम रहे क्षुद्रग्रह जिसको एस्टेरॉयड कहा जाता है, यह धरती के लिए खतरा पैदा कर देते हैं। इतिहास में ऐसे कई उदाहरण भी सामने आए हैं जब इन एस्टेरॉयड से धरती को नुकसान भी हुआ है।
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इसी बीच हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चेतावनी दी है कि एक विशाल एस्टेरॉयड धरती की ओर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह एस्टेरॉयड फ्रांस के एफिल टॉवर के आकार से भी बड़ा है।
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दरअसल, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक ऐसे एस्टेरॉयड के धरती से गुजरने की चेतावनी दी है, जिसका आकार दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग्स में शुमार फ्रांस के एफिल टॉवर से भी बड़ा है। नासा ने इस एस्टेरॉयड को संभावित रूप से खतरनाक ऐस्टरॉइड की श्रेणी में रखा है।
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इस एस्टेरॉयड के धरती से टकराने पर परिणाम भयानक हो सकता है लेकिन राहत की बात यह है कि यह हमारी धरती से काफी दूर से गुजर जाएगा और इतना ही नहीं धरती से होकर गुजरने के बाद इस तरह एस्टेरॉयड कम से कम 10 साल तक यहां नहीं आएगा।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक इस एस्टेरॉयड का नाम 4660 Nereus है और यह फुटबॉल की पिच से करीब तीन गुना बढ़ा है। नासा के अनुमान के मुताबिक यह 11 दिसंबर तक धरती के बेहद पास गुजरेगा।
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इस एस्टेरॉयड की दूरी 3.9 मिलियन किलोमीटर यानि धरती और चांद के बीच की दूरी का 10 गुना है। एस्टेरॉयड 330 मीटर लंबा है। एक रिपोर्ट के हवाले से यह भी बताया गया है कि अंतरिक्ष में मौजूद 90 फीसदी एस्टेरॉयड इससे छोटे हैं।
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रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि Nereus साल 1982 में खोजे गए अपोलो ग्रुप का ही सदस्य एस्टेरॉयड है। यह भी सूरज के ऑर्बिट से होकर धरती के पास से गुजरेगा, जैसा इससे पहले के एस्टेरॉयड करते रहे हैं। फिलहाल अच्छी बात यह है कि 11 दिसंबर तक धरती के बेहद पास से गुजरने वाले इस एस्टेरॉयड से धरती को कोई खतरा नहीं होगा।
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क्या होते हैं एस्टेरॉयड्स:
वे चट्टानें जो किसी ग्रह की तरह ही सूरज के चक्कर काटती हैं लेकिन यह आकार में ग्रहों से काफी छोटे होते हैं। सोलर सिस्टम बनने के बाद गैस और धूल के ऐसे बादल जो किसी ग्रह का आकार नहीं ले पाए और पीछे छूट गए, वही इन चट्टानों यानी एस्टेरॉयड में बदल गए। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा लगातार धरती के निकट मौजूद एस्टेरॉयड्स पर नजर रखती है।
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