जंगलों में धधक रही आग, 45 दिनों में 8022 आगजनी की घटनाएं, वन कर्मियों के हड़ताल से बढ़ी चिंता

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छत्तीसगढ़ के जंगलों में पिछले 45 दिनों में आग लगने की 8022 घटनाएं दर्ज की गई है। छत्तीसगढ़ वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, जंगल में आग की सबसे अधिक घटनाएं नक्सल प्रभावित जिलों में हुई है। 15 फरवरी से अब तक कुल 16.87 वर्ग किलोमीटर जंगल आग से प्रभावित हुआ है।

पिछले पखवाड़ेभर में जंगलों में आगजनी की बस्तर संभाग में सर्वाधिक 2900 व सरगुजा संभाग में 2500 घटनाएं दर्ज की गई है। हर साल 15 फरवरी से 15 जून के बीच जंगल में आग लगने की घटनाएं दर्ज की जाती है।

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वन अफसरों ने बताया कि जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने वन रेंज के प्रत्येक बीट में एक ‘फायर वॉचर’ की नियुक्ति की गई है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 4000 अग्निशमन कर्मियों को तैनात किया गया है। आग को फैलने से रोकने वन क्षेत्रों में फायर लाइन को काट कर साफ कर दिया गया है। जंगलों में आग को रोकने कर्मचारी आधुनिक उपकरणों का भी उपयोग कर रहे हैं।
आग से सबसे ज्यादा बीजापुर, नारायणपुर, धमतरी, बालोद और सरगुजा संभाग के कुछ जंगल हुए हैं। ओपी यादव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) ने कहा कि महुआ और अन्य लघु वनोपज संग्रह के लिए आग जलाने का सहारा नहीं लेने ग्रामीणों से कहा गया है।

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अधिकारियों ने बताया कि वन ग्राउंड स्टाफ 22 मार्च से वेतन, पेंशन, पदोन्नति और अन्य मुद्दों को लेकर हड़ताल पर हैं। फॉरेस्ट ग्राउंड स्टाफ (बीट गार्ड, फॉरेस्टर, डिप्टी रेंजर) की हड़ताल ने आग बुझाने का काम थोड़ा मुश्किल कर दिया है, लेकिन रेंज अधिकारी, उप-मंडल वन अधिकारी और संभागीय वन अधिकारी जंगल में बसे ग्रामीणों की मदद से आग को बुझाने में लगे हुए हैं। स्थिति अभी नियंत्रण में है।

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छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) राकेश चतुर्वेदी ने कहा कि ग्राउंड स्टाफ की अधिकांश मांगों पर विचार किया जाता है और हड़ताल जल्द ही समाप्त हो जाएगी।

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राज्य वन्यजीव सलाहकार बोर्ड के सदस्य अमलेंदु मिश्रा ने कहा कि अधिकांश आग संरक्षित क्षेत्रों में दर्ज की गई थी। यह दर्शाता है कि इन क्षेत्रों में शिकारी सक्रिय हैं। जंगली जानवरों को जंगल के एक कोने में धकेलने शिकारी आग लगा देते हैं। छत्तीसगढ़ वन विभाग को जंगल में और अधिक सक्रिय होना चाहिए। वहीं वन अफसरों का कहना है कि बस्तर, सरगुजा, धमतरी, बालोद व कवर्धा क्षेत्र के जंगलों में लगी आग पर काबू पाया जा चुका है। जंगलों में आगजनी की मुख्य वजहों में महुआ बीनने के लिए लोग पेड़ की नीचे पत्तों में आग लगा देते हैं। यही आग जंगल में विकराल रूप धारण कर लेता है।

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टोल फ्री नंबर 18002337000 पर दें सूचना
आगजनी की घटनाओं की सूचना देने के लिए वन विभाग ने टोल फ्री नंबर जारी किया है। वन विभाग ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय अरण्य भवन रायपुर में कंट्रोल रूम बनाया है। विभाग द्वारा जारी टोल फ्री नंबर 18002337000 पर कोई भी व्यक्ति आगजनी की सूचना दे सकता है। वहीं सभी वनमंडलों में भी वनों की सुरक्षा के लिए कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, जहां से निगरानी की जा रही है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख राकेश चतुर्वेदी ने विभाग के अधिकारियों को वनों में आगजनी की घटना रोकने आवश्यक निर्देश दिए हैं।

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Author: samachardoot

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