ओडिशा के खुर्दा जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां, पिछले चार साल से एक शख्स अपने बेटे के साथ गांव की कंगारू कोर्ट की ओर से लगाए जुर्माने से बचने के लिए अपहरण का नाटक किया था। पुलिस ने शख्स को राज्य के नयागढ़ जिले के एक गांव से पकड़ा है।
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सोमवार को नयागढ़ जिले के राणापुर थाना क्षेत्र के गोपालपुर गांव के खुर्दा जिले के टांगी थाने के पुलिसकर्मियों की एक टीम ने अरुण बेहरा (57) और उनके बेटे मानस (29) को देखा। प्रतिबंध के बावजूद चिल्का झील में मछली पकड़ने पर ग्राम समिति की ओर से लगाए गए फाइन से बचने के लिए पिता और पुत्र पिछले चार साल से भी अधिक समय थे गायब चल रहे थे।
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2018 में, चिल्का झील के किनारे स्थित हबराडी की ग्राम समिति ने ग्रामीणों को झील में मछली पकड़ने से रोक दिया था। बेहरा और उनके बेटे ने समिति के आदेश को न मानते हुए मछली पकड़ते पाए गए थे। आदेश नहीं मानने पर समिति ने कथित तौर पर परिवार पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाया था। जुर्मान भरने की बजाय इसके बाद पिता और पुत्र लापता हो गए थे और वापस नहीं आए।
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पुलिस अधिकारियों ने कहा कि बेहरा की पत्नी पार्वती ने तब तांगी पुलिस स्टेशन में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पति और बेटे का अपहरण कर लिया गया है, मामले की जांच की जाए। इसके साथ-साथ पत्नी ने पुलिस जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए ओडिशा मानवाधिकार आयोग का रुख किया था और बाद में उड़ीसा हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था।
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बालूगांव अनुमंडल पुलिस अधिकारी मानस बारिक ने कहा, ‘हमें हमेशा पिता-पुत्री की जोड़ी के अपहरण पर संदेह था, लेकिन उसके आरोपों को खारिज करने का कोई रास्ता नहीं था। खुर्दा के एक एसपी और दो निरीक्षकों को जांच की गति के बारे में अदालत को सूचित करने के लिए हाई कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ता है।
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अधिकारी ने आगे कहा कि पिछले 10-15 दिनों में एक पुलिस टीम ने महिला पर निगरानी रखनी शुरू की और उसका पीछा किया। हमारी टीम ने आखिरकार उसके पति और बेटे को नयागढ़ जिले में ढूंढ लिया। बारिक ने कहा कि शुरुआती जांच बाद, पुलिस ने पाया कि महिला को दो मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने उकसाया था, जिन्होंने उसे मानवाधिकार निकाय और हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए कहा था।
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बारिक ने कहा, ‘महिला ने कथित तौर पर दो कार्यकर्ताओं को पैसों का भुगतान करने के लिए अपनी जमीन बेचकर पांच लाख रुपए की व्यवस्ता की थी। उसने अदालती मामलों के लिए अपने गहने गिरवी रख कर बहुत पैसा खर्च किया है। यह वास्तव में दुखद है।
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पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नए तथ्यों के आलोक में मामले की फिर से जांच की जाएगी और महिला को अदालत जाने के लिए उकसाने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एसडीपीओ ने कहा, ‘हम इस बात की भी जांच करेंगे कि क्या पिता-पुत्र पर कोई जुर्माना लगाया गया था।’







