मध्य प्रदेश की खंडवा पुलिस ने एक अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह के पास से पुलिस ने लगभग 40 मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस के मुताबिक गिरोह का सरगना लॉकडाउन में बेरोजगार होने के बाद मोटरसाइकिल चोर बन गया।
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उसने अपने ऊपर लदे कर्ज के बोझ को कम करने के लिए चोरी करना शुरू कर दिया। यह चोर गिरोह आदिवासी इलाकों में चोरी की गाड़ियों को सस्ते दाम में बेचने का काम करता था। पुलिस ने चोर गिरोह के सरगना सहित 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। जो मोटरसाइकिल चुराने और उसे बेचने के काम में संलिप्त थे।
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खंडवा और आसपास के क्षेत्रों में लगातार मोटरसाइकिल चोरी की वारदात सामने आ रही थी। पुलिस ने चेकिंग पॉइंट लगाकर जब जांच शुरू की तो, खंडवा के खालवा थाने में एक चोरी की गाड़ी बरामद हुई। चेकिंग के दौरान एक व्यक्ति चोरी का वाहन चलाते हुए पकड़ा गया। पूछताछ में उसने चोर गिरोह के मुखिया परसराम पिता भागीरथ यादव का नाम बताया। पुलिस ने जब परसराम को अपनी गिरफ्त में लिया तो पूरे गिरोह का भंडाफोड़ हो गया।
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परसराम के साथ ही पुलिस ने ईश्वर, संजू, राजू, दीपक समेत 9 लोगों को खंडवा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार इन आरोपियों के पास से कुल 40 वाहन जब्त किए गए हैं। जिनकी कीमत लगभग 10 लाख से ज्यादा आंकी गई है।
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यह शातिर चोर खंडवा, बुरहानपुर, इंदौर और महाराष्ट्र से वाहन चुराकर आदिवासी क्षेत्रों में इन्हें बेचते थे। इन सभी को पुलिस रिमांड पर लेकर और पूछताछ कर रही है। जिसमें और भी चोरियों के खुलासे हो सकते हैं।
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अंतरराज्यीय मोटरसाइकिल चोर गिरोह का मुखिया परसराम खंडवा के खालवा का निवासी है। लॉकडाउन से पहले परसराम दूध बेचने और भैंस बेचने का धंधा करता था।
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लगभग डेढ़ वर्ष पहले जब लॉकडाउन था उस समय उसका यह धंधा बंद हो गया और उसके ऊपर कर्ज बढ़ने लगा। इसी कर्ज को उतारने के लिए परसराम ने बाइक चोरी जैसे अपराध को अपना धंधा बनाया।









