रेलवे की हाईटेक फॉग सेफ्टी डिवाइस से रेलवे की वर्षों पुरानी समस्या का हल निकल आया है। रेलवे का दावा है कि डिवाइस के जरिए कोहरे में भी अपनी रफ्तार से ट्रेन चलेगी और निर्धारित समय पर पहुंच सकेगी। इसके चलते रेलवे ने कोहरे के मौसम में निरस्त की कई गाड़ियों को फिर से बहाल कर दिया है।
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रेल अधिकारियों का कहना है, वर्षों पहले कोहरे के मौसम में लोको पायलट को सिग्नल देखने की दिक्कत रहती थी। इससे हादसे का डर अधिक था। वर्तमान समय में रेलवे के पास हाईटेक फॉग डिवाइस जैसे कई उपकरण हैं, जो रेल संचालन को बेहतर बनाते हैं। घने कोहरे में भी लोको पायलट को आगे सिग्नल का पता चल जाता है। इसलिए रेलवे बोर्ड ने निर्णय लिया कि ट्रेनों को जनहित में चलाया जाए।
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दो सप्ताह पहले ही कोहरे की वजह से रेलवे ने एक दिसंबर से 28 फरवरी तक कई ट्रेनों के निरस्त रखने का आदेश जारी कर दिया था। कई रेल डिवीजन ने ट्रेन संचालन को बोर्ड स्तर पर सुझाव भेजे।
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यात्रियों ने भी रेलवे को ट्रेन संचालन की मांग की। बोर्ड की कमेटी ने निर्णय लिया कि यदि हाईटेक व्यवस्था के जरिए रेल का संचालन शुरू किया जाए। सभी रेल डिवीजन से संबंधित ट्रेनों के संचालन की रिपोर्ट मांगी गई। जिस पर बोर्ड ने हरी झंडी दे दी।
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इज्जतनगर रेल मंडल ऑपरेटिंग विभाग ने टनकपुर जनशताब्दी एक्सप्रेस, त्रिवेणी एक्सप्रेस, रानीखेत एक्सप्रेस ,रामनगर-आगरा फोर्ट एक्सप्रेस, काठगोदाम- हावड़ा एक्सप्रेस, बाघ एक्सप्रेस के संचालन को रिपोर्ट भेज दी। रेल बोर्ड ने रानीखेत एक्सप्रेस और काठगोदाम हावड़ा एक्सप्रेस को एक दिसंबर से निरस्त किया था। मगर दोनों ट्रेनों के संचालन को फिर से हरी झंडी दे दी गई।
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इसी तरह से मुरादाबाद डिवीजन के बरेली जंक्शन से चलने वाली बरेली-दिल्ली पैसेंजर को भी चलाने का फैसला लिया गया। बरेली-बनारस, मुगलसराय एक्सप्रेस संचालित की जाएगी।
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रेलवे के मुताबिक, जीपीएस पर आधरित फॉग सेफ्टी डिवाइस में रेल रूट का डाटा फीड होता है। कहां पर सिग्नल, पुल और रेल क्रासिंग है, इसकी जानकारी डिवाइस में रहती है। जब लोको पालयट ड्यूटी लेता है, तो उसे डिवाइस दे दी जाती है। घना कोहरा होने पर भी 500 मीटर ही आगे क्रासिंग या सिग्नल आदि को इंडिकेट करती है।
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लाल या हरा सिग्नल का संकेत देने के साथ डिवाइस से आवाज आने लगती है। लोको पायलट ट्रेन की रफ्तार को नियंत्रित करता है। ड्राइवर अपनी सुविधा के अनुसार अंग्रेजी या हिंदी भाषा में आवाज को सेट कर सकता है। डिसप्ले देखे बिना भी आवाज सुनकर ड्राइवर जान लेता है कि आगे का सिग्नल, क्रासिंग या पुल है।









