छत्तीसगढ़ में हाल में हुई बेमौसम बारिश से खरीदी केंद्रों में धान भीगने को मंत्री-मंडलीय उप समिति ने गंभीरता से लिया है। खरीदी केंद्रों में धान को बारिश से बचाने कैप कव्हर, तालपत्री सहित विभिन्न इंतजामों के लिए पर्याप्त राशि सहकारी समितियों को दी गई है, बावजूद धान को भीगने से बचाया नहीं जा सका।
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6 जिलों में कुल 38 हजार टन धान बारिश से भीगा है। धान को बारिश से बचाने की गई लापरवाही के लिए समिति ने बेमेतरा, कवर्धा, राजनांदगांव, धमतरी, महासमुंद और रायपुर जिले के कलेक्टरों, जिला विपणन अधिकारियों और उप पंजीयकों को नोटिस जारी करने की अनुशंसा की है।
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खाद्य मंत्री अमरजीत भगत की अध्यक्षता में मंत्री-मंडलीय उप समिति की बैठक हुई, जिसमें खरीदी केंद्रों में धान भीगने की घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग द्वारा बारिश संबंधी अलर्ट पहले से जारी कर दिया गया था। इसके बाद भी धान को भीगने से बचाने पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए।
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बारिश के पहले एवं बाद में भौतिक सत्यापन भी नहीं किया गया। सही समय में कैपकव्हर, तालपत्री तथा अन्य आवश्यक व्यवस्था कर ली जाती तो धान को भीगने से बचाया जा सकता था। बैठक में वन एवं परिवहन मंत्री मो. अकबर, सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, खाद्य विभाग के विशेष सचिव मनोज सोनी, विशेष सचिव हिमशिखर गुप्ता, मार्कफेड की प्रबंध संचालक किरण कौशल आदि शामिल हुए।
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मंत्री मंडलीय उप समिति की बैठक में अधिकारियों ने बताया कि बेमेतरा, कवर्धा, राजनांदगांव, धमतरी, महासमुंद और रायपुर जिलों में कुल 38 हजार टन धान बारिश से भीगा है। इसे सुखाकर मिलिंग कराई जा सकती है। खरीदी केंद्रों में धान के भीगे बारदानों को पलटीकर सुखाया गया है, जिससे धान की कोई क्षति नहीं हुई है।
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बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 105 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी के लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 15 लाख से अधिक किसानों से 58.64 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चुकी है। किसानों को अब तक 10 हजार 934 करोड़ 50 लाख रुपए मार्कफेड द्वारा भुगतान किया जा चुका है।








