देश के कई राज्यों में गर्मी अपने चरम पर है और इस बीच एक बड़ा संकट बिजली कटौती का खड़ा हो सकता है। अधिकारियों के मुताबिक देश में बिजली की मांग 38 साल के उच्चतम स्तर पर है और कोयले की सप्लाई बीते 9 सालों में सबसे कम है। प्री-समर सप्लाई कम होने के चलते आने वाले दिनों में बिजली का संकट सामने आ सकता है।
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देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती की शुरुआत हो चुकी है। एक तरफ गर्मी चरम पर है तो वहीं दूसरी तरफ कोरोना संकट के बाद इंडस्ट्रीज ने रफ्तार पकड़ी है और वहां भी बिजली की डिमांड काफी ज्यादा है। ऐसे में बिजली संकट पैदा होना लाजिमी है।
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पंजाब, यूपी, बिहार, आंध्र प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और तेलंगाना में बीते कुछ दिनों पावर कट बढ़ गया है। महाराष्ट्र देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में से एक है और कोयले की सप्लाई के चलते अब अनिवार्य कटौती की ओर बढ़ रहा है।
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इस बीच गुजरात और तमिलनाडु ने आपूर्ति बनाए रखने के लिए अधिक कीमत पर बिजली की खरीद शुरू कर दी है ताकि कटौती से बचा जा सके। डिमांड के मुकाबले बीते सप्ताह देश में 1.4 फीसदी बिजली की कमी रही है। इससे पहले बीते साल अक्टूबर में ऐसी स्थिति पैदा हुई थी, तब यह कमी 1 फीसदी की ही थी। यानी इस बार संकट बीते साल के मुकाबले अधिक है।
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सोमवार को महाराष्ट्र के बिजली विभाग ने कहा कि उसने अब अनिवार्य कटौती की शुरुआत कर दी है। राज्य में 2,500 मेगावॉट बिजली की कमी है। महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में कटौती की जाएगी। विभाग ने कहा कि राज्य में 2,500 से 3,000 मेगावॉट बिजली की कमी है। रॉयटर्स के आकलन के मुताबिक एक और औद्योगिक राज्य आंध्र प्रदेश में भी बिजली की आपूर्ति में 8.7 फीसदी की कमी देखी जा रही है। इसके चलते राज्य में बिजली की कटौती में इजाफा हो गया है।
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पिछले कुछ दिनों में कई उद्योग 50 फीसदी क्षमता के साथ ही चल रहे हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में भी बड़े पैमाने पर बिजली में कटौती हो रही है और इसके चलते विपक्षी दल सरकार पर हमला बोल रहे हैं। इस पर वाईएस जगनमोहन रेड्डी की सरकार का कहना है कि यह संकट अस्थायी है। उन्होंने बताया कि राज्य में 50 से 55 मिलियन यूनिट तक बिजली की कमी देखी जा रही है।







