कॉर्बेट में गर्मियां शुरू होते ही गजराज ठंडे इलाकों की खोज में निकल गए हैं। ढिकाला के समीप से गुजर रही रामगंगा नदी व ग्रासलैंड में हाथियों के झुंड पहले से अधिक दिखने लगे हैं। पार्क के 1288 वर्ग किलोमीटर के दायरे में 1225 के करीब हाथी हैं। कॉर्बेट बाघों के अलावा हाथियों की संख्या के मामले में भी कई नेशनल पार्कों से आगे है।
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यहां पर सभी पर्यटन जोनों में हाथियों को झुंड के साथ विचरण करते हुए देखा जा सकता है। लेकिन गर्मियां शुरू होते ही हाथी ठंडे जंगल व पानी वाले क्षेत्रों की ओर पलायन करने लगे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ ऐजी अंसारी ने बताया कि ढिकाला का जंगल काफी घना है। यहां पर ग्रासलैंड होने से हाथी आसानी से विचरण करते हैं।
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खास बात यह है कि ग्रासलैंड के समीप से बह रही रामगंगा नदी से हाथियों को आसानी से पानी मिल जाता है। पर्याप्त पानी, भोजन मिलने से हाथियों का झुंड ढिकाला के जंगल में रहना पसंद करते हैं। बरसात में हाथी अन्य क्षेत्रों में चले जाते हैं।
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जंगल से सटी सड़कों पर खतरा
कॉर्बेट के बराबर में बने एनएच व अन्य रास्तों पर हाथियों के हमले का खतरा बना हुआ है। एनएच 309 पर कई बार हाथी हमला कर चुके हैं। बीते दिनों भी हाथी के सड़क पर आने से यातायात बाधित रहा। पार्क निदेशक राहुल ने बताया कि कोसी नदी में पानी पीने के लिए हाथी जंगल से बाहर आते हैं, ऐसे में वाहन चालकों को पहले हाथी को जाने देना चाहिए।
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झुंड का नेतृत्व करती है हथिनी
ऐजी अंसारी के अनुसार हाथी काफी बुद्धिमान वन्यजीव होते हैं। जब झुंड में शामिल होकर हाथी दूसरी जगहों पर जाते हैं तो वरिष्ठ हथिनी झुंड का नेतृत्व करती है। उसी के कहने पर झुंड में शामिल हाथी चलते हैं। नदी में पानी पीने व एक साथ नहाते भी हैं। झुंड में शामिल छोटे बच्चों को हथिनी सुरक्षित कर आगे लेकर चलती है।









