कोरबा: छुरी के बहुचर्चित राज ज्वेलर्स लूटकांड का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। जांच में सामने आया है कि हत्या, दुष्कर्म और अन्य गंभीर अपराधों में जेल जा चुके तीन आरोपितों की दोस्ती जेल के भीतर हुई थी। सजा पूरी होने के बाद तीनों ने बाहर निकलकर ज्वेलरी दुकान लूटने की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार पूरे घटनाक्रम का मास्टर माइंड विष्णु प्रसाद राठिया है, जिसने गोविंदा और चंकी पांडे अभिनीत फिल्म आंखें से प्रभावित होकर वारदात की पटकथा तैयार की। पहचान छिपाने के लिए एक आरोपित को महिला का भेष पहनाकर दुकान भेजा गया, लेकिन संचालक की बहादुरी से उनकी पूरी योजना धरी रह गई। पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है, जबकि मास्टरमाइंड की तलाश जारी है।
एक जुलाई की दोपहर करीब एक बजे तीनों आरोपित ग्राहक बनकर छुरी स्थित राज ज्वेलर्स पहुंचे। दो ने गमछे से चेहरा ढंक रखा था, जबकि तीसरा आरोपित सलवार सूट पहनकर महिला के भेष में दुकान के भीतर गया। चांदी की अंगूठी खरीदने के बहाने दुकान संचालक राजकुमार अग्रवाल को काउंटर तक बुलाया गया। मौका मिलते ही एक आरोपित ने दुकान का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया, जबकि दूसरे ने देसी कट्टा निकालकर संचालक की छाती पर अड़ा दिया। उनकी आंखों में मिर्च पाउडर डालने का भी प्रयास किया गया। इसी दौरान तीसरा आरोपित दुकान में रखे आभूषण बैग में भरने लगा।
हालात उस समय बदल गए जब राजकुमार अग्रवाल ने जान की परवाह किए बिना आरोपितों का मुकाबला कर दिया। छीना झपटी में उन्होंने एक आरोपित के हाथ से देसी कट्टा छीन लिया। अचानक विरोध का सामना होने और बाहर लोगों की भीड़ जुटने पर तीनों बदमाश घबरा गए। वे बिना लूट पूरी किए भाग निकले और जल्दबाजी में चोरी की बाइक तथा देसी कट्टा भी मौके पर छूट गया।
घटना के बाद पुलिस ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न मानते हुए जांच शुरू की। 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाले गए। साइबर विश्लेषण, तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपितों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। जांच के दौरान पता चला कि पुलिस से बचने के लिए वे लगातार जंगल के रास्तों का इस्तेमाल कर रहे थे।पुलिस टीम ने जशपुर, पत्थलगांव, धरमजयगढ़, सीतापुर और अंबिकापुर सहित कई इलाकों में लगातार दबिश दी। जांच में गोपाल सिंह गोंड, परदेशी राठिया और विष्णु प्रसाद राठिया की पहचान हुई।
पूछताछ में सामने आया कि तीनों पहले हत्या, दुष्कर्म और अन्य गंभीर मामलों में जेल जा चुके हैं। जेल में ही उनकी दोस्ती हुई और वहीं लूट की योजना पर चर्चा शुरू हुई। जेल से छूटने के बाद उन्होंने चोरी की बाइक की व्यवस्था की, देसी कट्टा जुटाया और कई दिनों तक रेकी करने के बाद वारदात को अंजाम देने पहुंचे। पुलिस ने गोपाल सिंह गोंड 38 वर्ष निवासी घुचापुर चौकी कोरबी थाना पसान और परदेशी राठिया 40 वर्ष निवासी ग्राम जिलगा (बरपाली) थाना श्यांग, को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड विष्णु प्रसाद राठिया निवासी कोलगा थाना करतला, अब भी फरार है। उसकी तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
पर्दाफाश करने बढ़ता जा रहा था पुलिस पर दबाव
कोरबा जिले में पिछले कुछ समय से लगातार सामने आ रही हत्या, लूट और अन्य संगीन वारदातों को लेकर कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे थे। विपक्ष भी लगातार पुलिस को निशाने पर ले रहा था। ऐसे समय में राज ज्वेलर्स लूटकांड पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया था। इस मामले का जल्द पर्दाफाश करना पुलिस की प्राथमिकता बन गया था। दो आरोपितों की गिरफ्तारी से पुलिस ने राहत की सांस ली है, हालांकि मुख्य आरोपित अब भी फरार होने से अभियान जारी है।
फिल्मी पटकथा की तरह बनाई थी लूट की योजना
पुलिस जांच में सामने आया कि फरार मास्टर माइंड विष्णु प्रसाद राठिया ने गोविंदा और चंकी पांडेय अभिनीत फिल्म आंखें से प्रभावित होकर वारदात की योजना बनाई थी। पहचान छिपाने के लिए एक साथी को महिला के भेष में सलवार सूट पहनाकर दुकान भेजा गया, जबकि अन्य दो ने चेहरा गमछे से ढंक लिया। योजना थी कि दुकानदार को झांसे में लेकर कुछ ही मिनटों में आभूषण समेटकर फरार हो जाएंगे, लेकिन संचालक के साहस और लोगों के मौके पर पहुंचने से पूरी साजिश नाकाम हो गई।







