खोंड के जंगलों में बाघ ने भैंस को उतारा मौत के घाट, सूरजपुर-कोरिया सीमा के गांवों में दहशत

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

भैयाथान। सूरजपुर और कोरिया जिले के सीमावर्ती जंगलों में बाघ की लगातार मौजूदगी अब ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बन गई है। कोरिया जिले के खोंड ग्राम पंचायत के जंगल में एक बाघ ने भैंस का शिकार कर दिया, जिससे आसपास के गांवों में दहशत फैल गई है। घटना के बाद जहां कोरिया वन विभाग की टीम सक्रिय होकर मौके पर पहुंची, वहीं सीमावर्ती क्षेत्र से जुड़े सूरजपुर जिले के ओड़गी वन परिक्षेत्र के अधिकारियों और कर्मचारियों की निष्क्रियता को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

जानकारी के अनुसार सूरजपुर जिले के बड़सरा निवासी धर्मजीत सिंह की भैंस जंगल किनारे चर रही थी। इसी दौरान बाघ ने हमला कर उसे मार डाला। सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर जुट गए। कोरिया जिले के टेमरी बीट प्रभारी अपनी टीम के साथ घटनास्थल पहुंचे और जांच के बाद भैंस की मौत बाघ के हमले से होने की पुष्टि की।
घटना के बाद वन विभाग ने बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लोकेशन ट्रैकिंग और अन्य तकनीकी माध्यमों का उपयोग शुरू किया है। आसपास के गांवों में लोगों को सतर्क रहने, अकेले जंगल की ओर नहीं जाने और मवेशियों को जंगल के किनारे नहीं छोड़ने की सलाह भी दी जा रही है। इस क्षेत्र में तीन बाघ के विचरण की जानकारी सामने आई है इसमें दो व्यस्त तथा एक बच्चा है
दो वर्षों से घूम रहा बाघ फिर भी नहीं बनी ठोस रणनीति
ग्रामीणों का कहना है कि बड़सरा, बसकर, कुधरीपारा, धरसेड़ी, सांवरांवा, गोविंदगढ़, ओड़गी सहित कोरिया जिले के टेमरी और कटकोना क्षेत्र में पिछले करीब दो वर्षों से बाघ की मौजूदगी के प्रमाण मिलते रहे हैं। कई बार पदचिह्न और गतिविधियां देखे जाने की सूचना भी वन विभाग को दी गई, लेकिन प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई।करीब एक वर्ष पहले टेमरी क्षेत्र में लगाए गए ट्रैप कैमरे में भी बाघ की तस्वीर कैद हुई थी। इसके बावजूद सीमावर्ती गांवों में व्यापक जागरूकता अभियान, नियमित मुनादी, विशेष गश्त और निगरानी जैसी व्यवस्थाएं पर्याप्त स्तर पर नहीं की गईं।इस बार भी ट्रैप कैमरे में बाघ की तस्वीर कैद हुई है।
ओड़गी के वन अमले की कार्यशैली से नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि बाघ की बढ़ती गतिविधियों के बावजूद सूरजपुर जिले के ओड़गी वन परिक्षेत्र का अमला क्षेत्र में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रहा है। उनका कहना है कि ताजा घटना के बाद भी कोरिया वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंच गई, जबकि ओड़गी क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों की मौजूदगी नजर नहीं आई।
हाल ही में रायपुर से पहुंचे बाघ विशेषज्ञों ने भी कोरिया वन विभाग के साथ क्षेत्र का निरीक्षण किया था। ग्रामीणों का आरोप है कि इस दौरान भी सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त स्तर पर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई गई, जिससे कई संवेदनशील इलाके प्रभावी निगरानी से बाहर रह गए।
ग्रामीणों में बढ़ा भय, सुरक्षा प्रबंध मजबूत करने की मांग
भैंस के शिकार की घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोगों का कहना है कि बाघ अब जंगल तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि आबादी के करीब पहुंच चुका है। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्रों में नियमित मुनादी, विशेष गश्ती दल की तैनाती, अतिरिक्त कैमरा ट्रैप लगाने, बाघ की लगातार मॉनिटरिंग तथा ग्रामीणों और मवेशियों की सुरक्षा के लिए ठोस एवं स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो सीमावर्ती क्षेत्र में लोगों की दिनचर्या और आजीविका पर भी असर पड़ सकता है।
samachardoot
Author: samachardoot

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें