राजनांदगांव। बोरतलाव के आश्रित ग्राम गांधीनगर में तालाब में खोदे गए जिस गड्ढे में डूबकर तीन मासूमों की मृत्यु हुई वह रेलवे ठेकेदार ने खोदकर छोड़े थे। बोरतलाव क्षेत्र में रेलवे की तीसरी लाइन के काम के दौरान क्षेत्र के कई भूखंडों में अंधाधुन उत्खनन किया गया।
इसकी गहराई 12 से 15 फीट तक है। वर्षाकाल में ये गड्ढे डबरी (छोटे तालाब) बन जाते हैं जिनकी गहराई का अंदाजा लगा पाना भी मुश्किल होता है। यही हादसे की वजह है जिसके सीधे जिम्मेदार रेलवे ठेकेदार हैं। रेलवे ठेकेदार का नाम राकेश कुमार जैन बताया जा रहा है।
क्षेत्र के किसानों ने बताया कि चार-पांच वर्ष पूर्व तीसरी लाइन का कार्य जारी होने के दौरान ठेकेदार ने उनकी जमीन से मुरुम निकालकर खेत बनाकर देने का आश्वासन दिया था। इसके बाद यहां नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए उत्खनन किया गया। हाईवा से लगातार मुरुम परिवहन हुआ।
कई बार दूसरे ग्रामीणों ने इस परिवहन का विरोध भी किया। कार्य समाप्त होने के बाद ठेकेदार गड्ढों को यूं ही छोड़कर चले गए। अब यही गड्ढे मौत की खाई बन रहे हैं।
मृत मासूमों के माता-पिता के दूसरे राज्यों में होने की वजह से गुरुवार को शवों का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। मृतक हितेश के स्वजन देर शाम यहां पहुंचे। जबकि मृतक कृष और दानिक के स्वजन की प्रतीक्षा की जा रही है। शवों का पीएम कर के बाद डोंगरगढ़ स्थित मोर्च्यूरी में रखा गया है। अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जाएगा।
रेलवे-माइनिंग भी घेरे में
- मासूमों की मृत्यु के बाद प्रकरण में बोरलाव पुलिस ने रेलवे ठेकेदार एवं अन्य के खिलाफ गैरइरादतन हत्या व संगठित अपराध की धारा के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
- बोरतालाव क्षेत्र में अंधाधुन उत्खनन के मामलों को लेकर रेलवे और माइनिंग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
- जिस गड्ढे में हादसा हुआ उसकी गहराई भी 12 फीट से अधिक है। खनिज नियमों के अनुसार बगैर व्यवसायिक अनुमति के उत्खनन और उसका उपयोग नहीं किया जा सकता था।
- ऐसे में वर्षों तक चले इसे अवैध उत्खनन पर कार्रवाई न करने के मामले में रेलवे, राजस्व और खनिज अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध हो जाती है।
ठेकेदार के लिए रेलवे की सफाई, स्वयं भी पल्ला झाड़ा
इस प्रकरण में रेलवे नागपुर मंडल की सफाई ने आक्रोश और बढ़ा दिया है। मंडल के वरिष्ठ डीसीएम दिलीप सिंह ने जानकारी दी है कि यह उत्खनन रेलवे भूखंड पर नहीं है इसलिए इसका रेलवे के निर्माण कार्य, रेलवे ठेकेदार अथवा रेलवे प्रशासन से कोई संबंध नहीं है। इस तरह रेलवे ने तीसरी लाइन का कार्य करने वाले ठेकेदार का भी पक्ष लेकर मामले से पल्ला झाड़ने की कोशिश की है।
परदेश में कमाकर बच्चों को पाल रहे थे, गोद ही सूनी हो गई
- बुधवार को गड्ढे में नहाने उतरे मासूम सगे भाई आठ वर्षीय कृष, सात वर्षीय दानिश मंडावी और पांच वर्षीय हितेश कोकाटे की मृत्यु हो गई।
- कृष और दानिश के माता पिता सूरत और हितेश के मां-पिता नासिक में रहकर रोजीरोटी कमाते हुए अपने बच्चों को पाल रहे थे।
- तीनों ही बच्चे अपने दादा-दादी के पास रहकर पढ़ाई कर रहे थे।
- इस हादसे ने दोनों मां की गोद सूनी कर दी है।
- कृष और दानिश सगे भाई थे और माता-पिता की दो ही संतानें थीं।
- जबकि कृष परिवार का अकेला बेटा था। इस घटना के बाद परिवार सकते में है, वहीं गांव में शोक व्याप्त है।
जांच समिति बनाई, ठेकेदार का मुंशी भी मौजूद था
इधर, गुरुवार की सुबह एसडीएम विश्वास कुमार, तहसीलदार, रेलवे पुलिस बल, पुलिस अधिकारियों का अमला मौके पर जांच के लिए पहुंचा। वहीं इस दौरान उत्खनन करने वाला ठेकेदार भी मौजूद था। अधिकारियो ने घटनास्थल का जायजा लेकर जांच के बिंदु निर्धारित किए। ग्रामीणों से पूछताछ कर उत्खनन की जानकारी जुटाई। एसडीएम ने बताया कि, कलेक्टर ने एडीएम के नेतृत्व में 10 सदस्यीय जांच समिति गठित की है। यह समिति अवैध उत्खनन सहित अन्य सभी मुद्दों की जांच करेगी।








