पुसौर/लारा
सब मनिसा मोर परजा’ का साकार रूप: एनटीपीसी लारा और आसपास के ग्रामीणों ने मिलकर निकाली भव्य बहुदा रथयात्रा
लारा, जुलाई 2026। भगवान जगन्नाथ के सार्वभौमिक संदेश “सब मनिसा मोर परजा” (सभी मनुष्य मेरी प्रजा हैं) को आत्मसात करते हुए एनटीपीसी लारा एवं आसपास के गांवों के श्रद्धालुओं ने मिलकर श्रद्धा, आस्था और सामाजिक समरसता के वातावरण में बहुदा रथयात्रा का भव्य आयोजन किया। इस आयोजन में एनटीपीसी के अधिकारी, कर्मचारी, उनके परिजन, प्रेरिता महिला समिति की सदस्याएं, सीआईएसएफ के जवान, टाउनशिपवासी तथा आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। यह आयोजन उद्योग और समाज के बीच आत्मीय जुड़ाव का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना से हुआ। इसके पश्चात पारंपरिक बहुदा रथयात्रा निकाली गई, जिसमें एनटीपीसी परिवार और आसपास के गांवों से आए श्रद्धालुओं ने एक साथ मिलकर सुसज्जित रथ को खींचा। भजन-कीर्तन, शंखनाद और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, सुख-समृद्धि तथा सभी के कल्याण की कामना की।
बहुदा रथयात्रा ने भगवान जगन्नाथ के अमर संदेश “सब मनिसा मोर परजा” को जीवंत रूप से अभिव्यक्त किया। यह संदेश जाति, धर्म, भाषा और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर समानता, समावेशिता, भाईचारे और साझा मानवता की भावना को सुदृढ़ करता है। जब एनटीपीसी परिवार और स्थानीय ग्रामीण एक साथ रथ को खींच रहे थे, तब यह दृश्य सामाजिक एकता, सहभागिता और आपसी विश्वास का प्रेरणादायी प्रतीक बन गया।
इस अवसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की प्रार्थना की। आयोजन के माध्यम से एनटीपीसी लारा ने एक बार फिर भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, स्थानीय समुदाय के साथ आत्मीय संबंधों को सुदृढ़ करने तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
बहुदा रथयात्रा केवल भगवान की वापसी यात्रा नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देने का अवसर बनी कि “सब मनिसा मोर परजा”—अर्थात सभी मनुष्य समान हैं और यही भावना एक सशक्त, समरस और समावेशी समाज की आधारशिला है।








